गांधी जयंती के पावन अवसर पर आज उत्तर प्रदेश की गलियों में देशभक्ति का जज्बा और विकास की चर्चाएं साथ चल रही हैं। राजधानी लखनऊ से लेकर पूर्वांचल के सुदूर जिलों तक, आज का दिन जहां बापू की यादों को ताज़ा कर रहा है, वहीं कुछ घटनाएं ऐसी भी हैं जो प्रशासन और जनता के बीच सवालों का घेरा बना रही हैं।
पूर्वांचल में बापू की अमिट छाप और जमीनी हकीकत
आज 2 अक्टूबर को पूर्वांचल के कई जिलों में महात्मा गांधी को याद किया गया। गाजीपुर में उस दौर की यादें ताजा हो गईं जब बापू बग्घी से यहां पहुंचे थे। वहीं सोनभद्र में खादी की विरासत को संजोने का काम आज भी जारी है। हालांकि, यह भी एक कड़वा सच है कि कई जिलों में गांधी जी की स्मृतियों से जुड़े निशान आज भी बदहाली और धूल के बीच दम तोड़ रहे हैं, जिसे सुधारने की दरकार है।
कानपुर में व्यापार और गंदगी का दोहरा चेहरा
कानपुर के लाजपत भवन में आज ‘इलेक्ट्रिक कांट्रेक्टर एंड मर्चेंट एसोसिएशन’ की ओर से बड़ा आयोजन किया गया। यहाँ लगी इलेक्ट्रिकल प्रदर्शनी में न केवल आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन हुआ, बल्कि दिव्यांग बच्चों की कला ने सबका मन मोह लिया। दूसरी ओर, शहर के मकनपुर मैदान की तस्वीर चिंताजनक है, जहां मेले के बाद पसरी गंदगी और दुर्गंध से स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है।
अपराध जगत की सुर्खियां: 26 महीने बाद खुला मां की हत्या का राज
यूपी में अपराध के मामलों में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। 26 महीने पहले हुई रामबेटी की हत्या का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने उसके बेटे महेंद्र को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपनी मां को मारकर निर्दोष लोगों को फंसाने की साजिश रची थी, लेकिन वैज्ञानिक जांच ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। वहीं, प्रेमानंद महाराज के आश्रम से एक शिष्य के लापता होने की घटना ने भी खलबली मचा दी है।
मायने और प्रभाव: आम आदमी के लिए क्या है खास?
- प्रशासनिक जवाबदेही: मकनपुर जैसी सार्वजनिक जगहों पर गंदगी का होना स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। स्वच्छता अभियान के दिन ही सफाई की ऐसी उपेक्षा प्रशासन की उदासीनता दर्शाती है।
- न्याय की जीत: रामबेटी हत्याकांड का खुलासा यह संदेश देता है कि कानून की पहुंच देर से ही सही, लेकिन अपराधियों तक जरूर होती है। यह उन लोगों के लिए सबक है जो अपराध करके बचने की फिराक में रहते हैं।
- धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा: आश्रमों में बढ़ती रहस्यमयी घटनाओं और बच्चों/शिष्यों के लापता होने के मामलों को देखते हुए, ऐसे संस्थानों में आंतरिक सुरक्षा और पारदर्शिता का होना अनिवार्य हो गया है।



