आगरा में बढ़ता चुनावी तनाव
आगरा की नवीन गल्ला मंडी में विधान परिषद (MLC) चुनाव की मतगणना के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। मतगणना केंद्रों के बाहर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा है, जहां पुलिस के साथ उनकी तीखी नोंक-झोंक की खबरें सामने आई हैं। सपा समर्थकों का आरोप है कि सत्ता के दबाव में प्रशासन द्वारा मतगणना को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
प्रत्याशियों के गंभीर आरोप
समाजवादी पार्टी के स्नातक प्रत्याशी शशांक यादव (सीटू) और निर्दलीय प्रत्याशी अम्बरीश पाल सिंह ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। प्रत्याशियों का दावा है कि मतपेटियों से जो मतपत्र निकल रहे हैं, वे 10-15 के बंच में हैं और कई मतपत्रों पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर तक गायब हैं।
मुख्य आपत्तियां:
- बिना हस्ताक्षर वाले मतपत्रों को भी जबरन गिना जा रहा है।
- मार्क किए हुए वोटों को बंडल में शामिल कर धांधली की कोशिश।
- प्रत्याशियों का आरोप है कि चुनाव अधिकारी निष्पक्षता बरतने के बजाय दबाव में काम कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में हो रही धांधली के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अखिलेश यादव ने दावा किया है कि सपा प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन अचानक मतगणना रोके जाने की सूचना से संदेह गहरा गया है।
प्रशासन का अपना पक्ष
विवाद के बीच प्रशासनिक अधिकारियों ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। डिविजनल कमिश्नर और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सपा प्रत्याशी खुद मतगणना टेबल पर मौजूद हैं और प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। अधिकारियों ने इसे भ्रामक जानकारी करार देते हुए कहा कि मतगणना नियमानुसार जारी है।
मायने और प्रभाव
आगरा का यह एमएलसी चुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि राजनीतिक साख की लड़ाई बन चुका है। मतगणना में इस तरह के आरोपों का सीधा असर स्थानीय मतदाताओं और शिक्षा जगत के बीच पड़ता है। यदि पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाता है। आम जनता और शिक्षक समुदाय के लिए यह महत्वपूर्ण है कि परिणाम पूरी तरह पारदर्शी हों ताकि जनादेश का सही सम्मान हो सके।







