उत्तर प्रदेश अब देश का ‘एक्सप्रेसवे स्टेट’ बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में इन्फ्रास्ट्रक्चर के महा-विस्तार के बीच एक और मेगा प्रोजेक्ट का ऐलान हुआ है, जो पूर्वांचल को हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर से सीधा जोड़ देगा। गोरखपुर से पानीपत तक बनने वाला यह नया एक्सप्रेसवे न केवल दूरी घटाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के विकास की नई इबारत भी लिखेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे से भी लंबा होगा रूट
यह प्रस्तावित गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे भविष्य में गंगा एक्सप्रेसवे से भी लंबा साबित होगा। करीब 750 किलोमीटर की लंबाई वाला यह प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। वर्तमान में गोरखपुर से हरियाणा या दिल्ली जाने में 12 से 14 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद आप महज 7 से 8 घंटे में यह सफर तय कर पाएंगे।
इन जिलों से होकर गुजरेगी विकास की रफ्तार
यह एक्सप्रेसवे यूपी के कुल 22 जिलों को एक सूत्र में पिरोने का काम करेगा। परियोजना के रूट मैप के अनुसार, यह सिद्धार्थनगर के बांसी से यूपी में प्रवेश करेगा और संतकबीरनगर, गोरखपुर सदर, कैपियरगंज, और कुशीनगर होते हुए आगे बढ़ेगा। इसके बाद यह बहराइच, बलरामपुर, अयोध्या, लखनऊ, शाहजहांपुर, बदायूं, मुरादाबाद और मेरठ होते हुए शामली और अंततः पानीपत तक जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 133 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।
35,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट
यह 6-लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे 35,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया जाएगा। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 8-लेन तक विस्तार देने की योजना भी शामिल है। NHAI ने इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू कर दिया है ताकि इसे तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जा सके।
मायने और प्रभाव: आम जनता को क्या मिलेगा?
इस एक्सप्रेसवे का असर सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं है, इसके गहरे आर्थिक प्रभाव होंगे:
- व्यापार में तेजी: पूर्वांचल के छोटे और मंझोले कारोबारियों के लिए दिल्ली-हरियाणा की मंडियों तक पहुंच आसान होगी, जिससे माल ढुलाई का खर्च कम होगा।
- रोजगार के अवसर: एक्सप्रेसवे के आसपास नए औद्योगिक कॉरिडोर और लॉजिस्टिक हब बनने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होंगे।
- कनेक्टिविटी का जाल: यह रूट अयोध्या और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों को सीधे जोड़ता है, जिससे धार्मिक और व्यावसायिक पर्यटन को बड़ा बूस्ट मिलेगा।




