समुद्र से उठकर आसमान छूता पर्वत
क्या आप जानते हैं कि आज जहां आप हिमालय की बर्फीली चोटियों को देखते हैं, लाखों साल पहले वहां एक विशाल समुद्र हुआ करता था? टेथिस सागर के मलबे से पैदा हुआ यह हिमालय दुनिया का सबसे युवा पर्वत है, जो आज भी हर साल करीब 5 मिलीमीटर ऊंचा हो रहा है।
लेकिन यह बढ़ती ऊंचाई और इसकी भव्यता के पीछे एक गंभीर खतरा भी छिपा है। हिमालय आज अपनी उम्र के जिस पड़ाव पर है, वहां इसका स्थिर रहना मुश्किल होता जा रहा है।
क्यों बदल रहा है हिमालय का मिजाज?
हिमालय केवल भारत की सीमा पर खड़ी एक दीवार नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे जलवायु चक्र का केंद्र है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से उत्तराखंड से लेकर पूरे हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं की आवृत्ति बढ़ी है, उसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।
- जलवायु परिवर्तन का असर: हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जो बाद में भारी बाढ़ और भूस्खलन का कारण बनते हैं।
- अंधाधुंध निर्माण: पहाड़ों को काटकर बनाई जा रही सड़कें और बड़े प्रोजेक्ट्स ने इस नाजुक इकोसिस्टम को अस्थिर कर दिया है।
- बढ़ता तापमान: पहाड़ों पर बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप ने बर्फबारी के पैटर्न को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है संकेत?
इस पूरी स्थिति का सबसे सीधा असर उत्तर भारत की जनता पर पड़ेगा। हिमालय से निकलने वाली गंगा, यमुना और अन्य नदियां करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती हैं और खेती का आधार हैं। अगर हिमालयी क्षेत्र में अस्थिरता बनी रही, तो इसका मतलब है कि कभी सुखाड़ तो कभी विनाशकारी बाढ़ का सामना करना हमारी नियति बन जाएगी।
विकास के नाम पर हिमालय की अनदेखी करना अब हमें महंगा पड़ रहा है। हमें यह समझने की जरूरत है कि हिमालय हमारे लिए कोई ‘संसाधन’ नहीं, बल्कि ‘जीवन रक्षक’ है। इसे बचाने का मतलब है आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व को सुरक्षित करना।



