उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया, लेकिन अब अदालत ने इस घिनौने अपराध पर कड़ा प्रहार किया है। एक 12 वर्षीय दिव्यांग बालिका के साथ दरिंदगी करने वाले आरोपी को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए ताउम्र जेल की सजा सुनाई है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना अमृतपुर थाना क्षेत्र के पिथनापुर गांव की है। 22 फरवरी 2022 की दोपहर, जब एक 12 वर्षीय दिव्यांग बच्ची शौचालय गई थी, तब पड़ोसी श्रवण कुमार उर्फ रामवीर सिंह ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोपी ने मासूम को जान से मारने की धमकी देकर खामोश रहने पर मजबूर कर दिया था।
बच्ची लंबे समय तक डर के साये में रही, लेकिन जब दर्द असहनीय हो गया, तो उसने अपनी मां को इस खौफनाक वारदात के बारे में बताया। इसके बाद परिवार ने हिम्मत जुटाकर थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
कोर्ट का कड़ा फैसला
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) रितिका त्यागी की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेज सिंह राजपूत ने पुख्ता सबूत और गवाहों को अदालत के सामने पेश किया। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने श्रवण कुमार को दोषी पाया और उसे शेष जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, उस पर 1.02 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मायने और प्रभाव
- सुरक्षा का कड़ा संदेश: यह फैसला उन दरिंदों के लिए एक चेतावनी है जो कमजोर को अपना आसान शिकार समझते हैं। न्याय प्रणाली ने साबित किया है कि पॉक्सो एक्ट के तहत अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
- परिवार को राहत: लंबे कानूनी संघर्ष के बाद पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलने से समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा बढ़ा है।
- जागरूकता जरूरी: इस मामले ने यह भी दिखाया है कि अभिभावकों को अपने बच्चों, विशेषकर दिव्यांग बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना कितना जरूरी है, ताकि वे बिना डरे अपनी बात साझा कर सकें।




