उत्तर प्रदेश के स्कूलों में पितृ विसर्जन के दिन अवकाश को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश भर के शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि 10 अक्टूबर को पितृ विसर्जन के अवसर पर स्कूलों में छुट्टी घोषित की जाए। इस मांग के बाद अभिभावकों और शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
पितृ पक्ष का समापन पितृ विसर्जन के साथ होता है, जिसे हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। उत्तर प्रदेश के कई शिक्षक संघों का तर्क है कि इस दिन पारिवारिक और धार्मिक दायित्वों के कारण शिक्षकों की उपस्थिति प्रभावित हो सकती है। इसे देखते हुए उन्होंने शासन को ज्ञापन सौंपकर अवकाश की मांग रखी है।
अकादमिक कैलेंडर के नियम क्या कहते हैं?
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा विभाग का अपना एक वार्षिक कैलेंडर होता है। वर्तमान नियमों के अनुसार:
- छुट्टियों का निर्धारण सत्र की शुरुआत में ही कर दिया जाता है।
- किसी भी नए अवकाश के लिए जिला प्रशासन या राज्य सरकार के विशेष आदेश की आवश्यकता होती है।
- अभी तक आधिकारिक कैलेंडर में इस दिन के लिए किसी अनिवार्य अवकाश का प्रावधान नहीं है।
मायने और प्रभाव
अगर सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो राज्य के लाखों छात्रों और शिक्षकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव होगा। हालांकि, शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती शैक्षिक दिनों (Academic Days) को पूरा करने की होती है। एक अतिरिक्त छुट्टी का सीधा असर पाठ्यक्रम पूरा करने की समय-सीमा पर पड़ता है।
स्थानीय स्तर पर, कई स्कूलों में पहले से ही पितृ पक्ष के दौरान कार्यक्रमों का आयोजन होता है, लेकिन पूर्ण अवकाश न होने से कामकाज पर असर पड़ता है। फिलहाल, सभी की निगाहें शासन के अगले आदेश पर टिकी हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्कूल प्रशासन से ही सूचना की पुष्टि करें।



