मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता कमलनाथ की मुश्किलें भले ही राजनीति में हों, लेकिन उत्तर प्रदेश के बिजनौर में उनके परिवार की पुश्तैनी जमीन पर नजरें गड़ाए बैठे भू-माफियाओं ने एक बड़ा जाल बुना है। बिजनौर के गांव अमीखानपुर में स्थित कमलनाथ के पिता स्व. महेंद्रनाथ की 90 बीघा जमीन का एक बड़ा हिस्सा हड़पने की कोशिश का खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
अमीखानपुर गांव में पूर्व सीएम के पिता के नाम करीब 90 बीघा कृषि भूमि दर्ज है। शातिर दिमाग अपराधियों ने इस बेशकीमती जमीन को हथियाने के लिए एक ऐसा खेल रचा जो कानूनी दांव-पेंचों को मात देने वाला था। आरोप है कि गिरोह ने फर्जी तरीके से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए और एक जाली वसीयत तैयार की, ताकि जमीन का मालिकाना हक बदला जा सके।
लेखपाल समेत चार पर केस, दो हिरासत में
इस साजिश में सरकारी तंत्र की मिलीभगत की बात भी सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में नामजद मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें एक लेखपाल भी शामिल है। जांच में पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करने के लिए पूरी तैयारी की गई थी। अब तक दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।
- फर्जीवाड़ा: स्व. महेंद्रनाथ की जाली वसीयत तैयार करना।
- मिलीभगत: सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ के लिए लेखपाल की भूमिका।
- खुलासा: जमीन के कागजों के मिलान के दौरान फ्रॉड का पता चला।
मायने और प्रभाव: आम आदमी के लिए क्या सबक?
यह मामला महज एक राजनेता की जमीन का नहीं है, बल्कि यह बताता है कि कैसे जमीन माफिया आम लोगों की संपत्ति को भी अपना निशाना बना सकते हैं। यदि एक पूर्व मुख्यमंत्री की संपत्ति सुरक्षित नहीं है, तो एक आम किसान की जमीन के कागजात कितने असुरक्षित हो सकते हैं, यह बड़ा सवाल है।
इस घटना से साफ है कि यदि आपकी कोई पैतृक संपत्ति या जमीन है, तो समय-समय पर खतौनी और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराते रहें। बिजनौर की इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में चल रहे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के उस काले सच को भी उजागर किया है, जिससे आम जनता को हर रोज जूझना पड़ता है।



