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बरेली: कोर्ट परिसर में डॉक्टर पति ने दिया तीन तलाक, बोला- मुझे UCC नहीं, शरीयत मंजूर है

उत्तर प्रदेश के बरेली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून और आस्था की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। एक डॉक्टर पति ने भरे कोर्ट परिसर में अपनी पत्नी को तीन तलाक दे दिया, जिससे वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। पीड़ित महिला का आरोप है कि पति ने देश के मौजूदा कानूनों को धता बताते हुए साफ कहा कि वह केवल शरीयत को मानता है।

कोर्ट परिसर में मचा हड़कंप

यह घटना बरेली की पारिवारिक अदालत की है। पीड़िता के अनुसार, वह अपने पति के साथ विवाद के सिलसिले में कोर्ट पहुंची थी। बातचीत के दौरान जैसे ही बहस बढ़ी, पति ने सबके सामने तीन बार ‘तलाक’ बोलकर अपने रिश्ते को खत्म कर दिया। पीड़िता का कहना है कि उसने पति को समझाने की कोशिश की, लेकिन उसने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) जैसे किसी भी सरकारी कानून को मानने से साफ इनकार कर दिया।

पीड़िता ने पुलिस से लगाई गुहार

इस घटना के बाद पीड़िता ने तुरंत स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने पुलिस को बताया कि डॉक्टर पति की यह हरकत न केवल अपमानजनक है, बल्कि अवैध भी है। उसने आरोप लगाया कि उसके पति का व्यवहार काफी समय से कठोर हो गया था और वह किसी भी कानून के दायरे में रहने को तैयार नहीं है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और कानूनी जानकारों से सलाह ली जा रही है कि इस स्थिति में आगे की कार्रवाई क्या होगी।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी?

इस मामले के कानूनी और सामाजिक दोनों ही पहलू बेहद गंभीर हैं। इसके मायने निम्नलिखित हैं:

  • कानूनी चुनौती: केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए कानूनों और व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
  • महिला सुरक्षा: सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद इस तरह की घटनाओं का सामने आना यह दर्शाता है कि कानून का पालन कराने में अभी भी जमीनी स्तर पर बड़ी चुनौतियां हैं।
  • जागरूकता की कमी: समाज में अभी भी कानून की जानकारी के बावजूद अपनी परंपराओं और मान्यताओं को प्राथमिकता देने का चलन बना हुआ है, जो भविष्य में बड़े कानूनी विवादों को जन्म दे सकता है।

यह मामला स्पष्ट करता है कि कानून चाहे जितने भी कड़े क्यों न हों, जब तक समाज की मानसिकता में बदलाव नहीं आता, तब तक पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

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