गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में मानसून की दस्तक के साथ ही एक अलग ही हलचल शुरू हो गई है। रिमझिम फुहारों के बीच यहां के वन्यजीवों का व्यवहार पूरी तरह बदल चुका है, जो पर्यटकों के लिए एक दिलचस्प नज़ारा पेश कर रहा है।
पानी में अठखेलियां करते हिप्पो और गैंडे
बारिश के मौसम का सबसे ज्यादा लुत्फ लेते हुए हिप्पो (दरियाई घोड़ा), गैंडा और हाथी दिखाई दे रहे हैं। जैसे ही आसमान से पानी बरसता है, ये विशालकाय जानवर बाड़े के तालाबों में उतरकर घंटों मस्ती करते हैं। गर्मी से निजात पाने के बाद इनकी सक्रियता में खासा इजाफा हुआ है, जिसे देखने के लिए सुबह-शाम पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है।
शेर और बाघ को है सूखी जगह की तलाश
जहाँ कुछ जानवर बारिश में नहा रहे हैं, वहीं जंगल का राजा शेर और बाघ अपनी प्रकृति के अनुरूप बारिश से बचते नजर आते हैं। ये वन्यजीव ज्यादातर समय अपने शेल्टर (बंद कमरों) में गुजारना पसंद करते हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक, बड़ी बिल्लियों की प्रजाति नमी से खुद को बचाकर रखती है और शांत रहती है।
मानसून में विशेष सुरक्षा और साफ-सफाई
मानसून के दौरान संक्रमण का खतरा बढ़ने के कारण चिड़ियाघर प्रशासन ने कमर कस ली है। जानवरों के बाड़ों की विशेष साफ-सफाई की जा रही है और उनके खान-पान पर विशेषज्ञों की पैनी नजर है। बाड़ों में जलजमाव न हो, इसके लिए ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया गया है ताकि किसी भी तरह की बीमारी न फैले।
मायने और प्रभाव
गोरखपुर चिड़ियाघर में वन्यजीवों के इस व्यवहार परिवर्तन को समझना पर्यटकों के लिए एक एजुकेशनल अनुभव है। मानसून का यह दौर न केवल जानवरों की प्राकृतिक आदतों को करीब से जानने का मौका देता है, बल्कि यह भी बताता है कि बदलते मौसम में वन्यजीवों की देखभाल कितनी चुनौतीपूर्ण होती है। स्थानीय लोगों के लिए यह शहर का सबसे बड़ा ‘नेचर गेटवे’ है, जो इस सीजन में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी कर रहा है।


