गोरखपुर में एक 10 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के आरोपी कॉन्स्टेबल अभिषेक यादव को जब पुलिस टीम मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई, तो वहां का मंजर किसी फिल्म के सीन जैसा था। अस्पताल में मौजूद आक्रोशित भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में ही आरोपी सिपाही को घेर लिया और उस पर लात-घूंसों की बरसात कर दी।
घटना का आँखों देखा हाल
गुरुवार का दिन था जब पुलिस बल कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी अभिषेक यादव को लेकर अस्पताल पहुँचा। जैसे ही लोगों को यह भनक लगी कि बच्ची की हत्या का आरोपी सामने है, वहां भारी भीड़ जमा हो गई। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और लोगों ने आरोपी को सबक सिखाने की कोशिश शुरू कर दी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे आरोपी खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है, जबकि लोग उस पर लगातार हमले कर रहे हैं। पुलिसकर्मियों को उसे सुरक्षित निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आखिर मामला क्या है?
यह पूरा मामला एक मासूम बच्ची के अपहरण और निर्मम हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे गोरखपुर को हिलाकर रख दिया है। आरोपी कोई और नहीं बल्कि खाकी वर्दी में तैनात एक सिपाही है, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी?
इस घटना के कई गहरे संदेश हैं जो समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं:
- खाकी पर से भरोसा: जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर दिखना लाजिमी है। यह घटना पुलिस व्यवस्था के भीतर सुधार की मांग को और तेज करती है।
- भीड़ का कानून: हालांकि जनता का गुस्सा वाजिब है, लेकिन कानून को हाथ में लेना किसी समस्या का हल नहीं है। इससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है।
- सुरक्षा पर सवाल: अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा का यह हाल सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े करता है।


