शादी के बाद हर जोड़े के लिए हनीमून का सफर हसीन यादों की तरह होता है, लेकिन गोरखपुर की एक नवविवाहिता के लिए यह सफर किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। अंडमान की खूबसूरत वादियों में शुरू हुई एक नई जिंदगी की शुरुआत मारपीट और जानलेवा हमले के साथ हुई, जिसने रिश्तों की नींव को ही हिलाकर रख दिया है।
हनीमून पर हुआ ‘खून का खेल’
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि हनीमून के दौरान उसे पीरियड्स आ गए, जिसके कारण उसे शारीरिक तकलीफ हो रही थी। जब उसने यह बात अपने पति को बताई, तो उसे लगा था कि पति उसका सहारा बनेगा, लेकिन हुआ इसके उलट। पति ने उसे समझने के बजाय यह कहकर पीटना शुरू कर दिया कि उसने पहले जानकारी क्यों नहीं दी।
मामला यहीं नहीं रुका, पति का गुस्सा इतना हिंसक हो गया कि उसने महिला पर थप्पड़ों और घूंसों की बरसात कर दी। हद तो तब हो गई जब उसने महिला का गला दबाकर उसे जान से मारने की कोशिश की। होटल कर्मचारियों के समय पर दखल देने से पीड़िता की जान बच सकी।
दहेज का लालच और शादी के बाद प्रताड़ना
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि इस हिंसा की जड़ें शादी के दिन से ही जुड़ी हुई हैं। साल 2023 में दिल्ली में संपन्न हुई इस शादी में उसके पिता ने 20 लाख रुपये नकद, एक कार और करीब 40 लाख रुपये का कीमती सामान दहेज के रूप में दिया था। बावजूद इसके, ससुराल वाले लगातार और सामान की मांग करते रहे।
मायने और प्रभाव
यह घटना समाज में व्याप्त गहरी विकृतियों को उजागर करती है। महज एक शारीरिक प्रक्रिया को लेकर इस स्तर की हिंसा यह दर्शाती है कि रिश्तों में मानवीय संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- दहेज का काला सच: भारी रकम खर्च करने के बाद भी महिला का सुरक्षित न होना, दहेज प्रथा के खिलाफ सख्त कानूनों की जरूरत को फिर से रेखांकित करता है।
- मानसिकता पर प्रहार: पीरियड्स जैसे सामान्य शारीरिक विषय पर हिंसा करना पति की संकीर्ण मानसिकता और महिला के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है।
- कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने महिला की शिकायत पर पति के साथ-साथ सास और ननद के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। यह उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो चुपचाप घरेलू हिंसा सह रही हैं।
फिलहाल पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की तैयारी है।


