सड़क या मौत का जाल? कानपुर में थम नहीं रहे हादसे
कानपुर की सड़कों की बदहाली एक बार फिर किसी की जान पर बन आई है। शहर के एक व्यस्त मार्ग पर गड्ढों से बचने की कोशिश में एक मारुति ओमनी वैन अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे ऑटो से जा भिड़ी। इस दर्दनाक हादसे में ऑटो में सवार एक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
24 घंटे में दूसरी बड़ी दुर्घटना
हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग पर पिछले 24 घंटों के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है। ठीक एक दिन पहले, इसी तरह गड्ढे से बचने के प्रयास में एक डंपर और स्कूली बस की भीषण टक्कर हो गई थी, जिसमें एक शिक्षिका ने अपनी जान गंवा दी थी। प्रशासन की खामोशी और सड़कों की खस्ताहाल स्थिति अब आम जनता के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।
प्रशासन की लापरवाही और जनता की मजबूरी
शहर के लोग रोजाना अपनी जान हथेली पर लेकर इन रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। गड्ढों को भरने के दावे अक्सर कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। जब भी कोई हादसा होता है, तो सुध लेने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।
- सड़क पर मौजूद गहरे गड्ढे बने हादसों का सबब।
- तेज रफ्तार और खराब सड़क का घातक मिश्रण।
- आम आदमी की सुरक्षा पर गहराते सवाल।
मायने और प्रभाव
कानपुर में हो रही ये दुर्घटनाएं महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी विफलता को दर्शाती हैं। सड़कों पर बने गड्ढे अब ‘मौत के गड्ढे’ बनते जा रहे हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और जान दोनों पर पड़ रहा है। अगर समय रहते सड़कों की मरम्मत नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में और भी कीमती जानें जा सकती हैं। शहर के जिम्मेदार अधिकारियों को अब ‘सड़कों की मरहम-पट्टी’ नहीं, बल्कि स्थायी समाधान पर ध्यान देना होगा ताकि लोग सुरक्षित अपने घरों तक पहुंच सकें।



