कानपुर में खाकी के रसूख का एक और शर्मनाक चेहरा सामने आया है। महाराजपुर इलाके के पुरवामीर चौकी इंचार्ज पर एक बुजुर्ग दुकानदार को धमकाने और उनसे मुफ्त में गुटका मांगने का आरोप लगा है। जब दुकानदार ने नियम के खिलाफ जाकर मुफ्त सामान देने से मना किया, तो दरोगा ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए अभद्रता की सारी हदें पार कर दीं।
क्या है पूरा मामला?
पुरवामीर गांव के निवासी रामशरण सिंह बाबा, जो एक छोटा सा चाय-नाश्ते का होटल चलाते हैं, ने पुलिस के उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी। बुजुर्ग का आरोप है कि छह जून की देर रात चौकी प्रभारी राजेश सिंह उनकी दुकान पर पहुंचे। वहां उन्होंने मुफ्त में गुटका मांगा और जब बुजुर्ग ने मना किया, तो दरोगा ने उन्हें सरेआम गाली-गलौज दी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
दुकान खाली कराने का दबाव
विवाद यहीं नहीं थमा। शिकायत के बाद जब दरोगा को इसकी भनक लगी, तो आरोप है कि उन्होंने बदले की भावना से काम लिया। दरोगा ने बुजुर्ग दुकानदार के मकान मालिक पर दबाव बनाकर दुकान ही खाली करवा दी। इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने महाराजपुर थाने पहुंचकर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।
जांच और कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी कैंट को जांच सौंपी गई। जांच में सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर चौकी प्रभारी राजेश सिंह को दोषी पाया गया। एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह ने पुष्टि की है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दरोगा को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।
मायने और प्रभाव
यह घटना सीधे तौर पर पुलिस और आम जनता के बीच के भरोसे को प्रभावित करती है। एक वर्दीधारी पुलिस अधिकारी से कानून की रक्षा की उम्मीद की जाती है, लेकिन जब वही अधिकारी निजी स्वार्थ और छोटी चीजों के लिए गरीब बुजुर्गों को प्रताड़ित करने लगे, तो यह व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग के लिए एक संदेश है कि अनुशासनहीनता और दबंगई किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समाज के लिए जरूरी है कि ऐसे मामलों में चुप्पी न तोड़ी जाए और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई जाए।



