"रोज नई ऊर्जा, नई सोच के साथ"

ताजा खबर पडरौना कुशीनगर उत्तर प्रदेश राजनीति क्रिकेट स्पोर्ट्स देश विदेश मौसम बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल राशिफल आध्यात्मिक अन्य

सिटी इंस्टीट्यूट

ऑफ पैरामेडिकल कॉलेज

ADMISSION OPEN
DMLT | DPT | ऑपरेशन थियेटर टेक्निशियन
एवं अन्य पैरामेडिकल कोर्स
9984858492

करवा चौथ 2026: शुक्र के बालत्वकाल को लेकर संशय खत्म, क्या नवविवाहिताएं रख सकती हैं व्रत?

करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। लेकिन इस साल सोशल मीडिया और चर्चाओं के गलियारों में एक दुविधा बनी हुई थी कि क्या शुक्र के बालत्वकाल (Infancy Phase) के दौरान नवविवाहिताएं व्रत रख सकती हैं? कानपुर की श्री ब्रह्मावर्त विद्वतपरिषद ने अब इस पर स्थिति साफ कर दी है, जिससे लाखों महिलाओं का कन्फ्यूजन दूर हो गया है।

शास्त्रीय मत: क्या कहता है विधान?

आमतौर पर विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुक्र के उदय होने का इंतजार किया जाता है, लेकिन व्रत और पूजा-पाठ के नियम इससे अलग होते हैं। श्री ब्रह्मावर्त विद्वतपरिषद के महामंत्री आचार्य चंद्र प्रकाश त्रिपाठी के अनुसार, करवा चौथ और बरगदाही जैसे व्रत स्त्री के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

शास्त्रों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि शुक्र या गुरु के बालत्वकाल में इन व्रतों को टाला जाना चाहिए। ये व्रत एक निश्चित तिथि और समय पर ही किए जाते हैं, जिन्हें आगे-पीछे करना संभव नहीं होता। इसलिए, शुक्र के अस्त या बालत्वकाल का इन व्रतों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता है।

निर्णय सिंधु का स्पष्ट निर्देश

विद्वतपरिषद ने अपने निर्णय का आधार ‘निर्णय सिंधु’ की संहिता प्रदीप को बनाया है। इसके अनुसार, जब गुरु या शुक्र का उदय हो जाता है, तो उनका बालत्वकाल भी शुभ माना जाता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित पीएन द्विवेदी का तर्क है कि शुक्र के उदय होने के तीन दिन बाद तक बालत्वकाल रहता है, लेकिन यह किसी भी तरह से महिला के व्रत रखने में बाधा नहीं बनता।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी?

इस स्पष्टीकरण का सीधा असर उन हजारों परिवारों पर पड़ा है जहाँ पहली बार करवा चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है।

  • धार्मिक आस्था की जीत: इस व्यवस्था ने उन महिलाओं को बड़ी राहत दी है जो लोक-लाज और धार्मिक मान्यताओं के बीच उलझी हुई थीं।
  • अंधविश्वास पर लगाम: सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं को दरकिनार कर विद्वानों ने स्पष्ट किया है कि करवा चौथ जैसे व्रत के लिए किसी ग्रह की स्थिति की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
  • पारिवारिक सामंजस्य: अब बिना किसी डर या संशय के महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए पूर्ण श्रद्धा के साथ व्रत का पालन कर सकेंगी।

सरल शब्दों में कहें तो, आपकी श्रद्धा और निष्ठा ग्रहों की चाल से बड़ी है। इसलिए बिना किसी हिचकिचाहट के इस साल करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ मनाएं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Leave a Comment