गर्मी और उमस के बीच जूझ रहे लोगों के लिए राहत की एक उम्मीद जगी है। प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो (El Nino) को लेकर अक्सर मन में डर रहता है कि यह मानसून को सुखा देगा, लेकिन मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों की ताजा रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अब सवाल यह है कि क्या अल नीनो के इस दौर में हमें अच्छी बारिश देखने को मिलेगी?
अल नीनो का असल खेल: क्या सूख जाएगा मानसून?
आमतौर पर अल नीनो का नाम सुनते ही लोग सूखे की चिंता करने लगते हैं। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अल नीनो का मतलब पूरी तरह से सूखा नहीं होता। असल में यह मानसून की प्रकृति को बदल देता है। इसमें बारिश तो होती है, लेकिन लगातार नहीं।
बारिश के दिनों के बीच का फासला बढ़ जाता है। यानी आप लंबे समय तक सूखे दिन देखेंगे और फिर अचानक से झमाझम बारिश होगी। यह स्थिति खेती और आम जनजीवन के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन मानसून पूरी तरह नदारद नहीं रहता।
क्यों जरूरी है मौसम के इस बदलाव को समझना?
मौसम विशेषज्ञ अजय मिश्रा के अनुसार, जब अल नीनो मजबूत होता है, तो बारिश ‘पॉकेट वर्षा’ (Pocket Rain) के रूप में होती है। इसका सीधा मतलब है कि एक मोहल्ले में अच्छी बारिश हो रही होगी, जबकि थोड़ी ही दूरी पर जमीन सूखी होगी।
- इतिहास गवाह है: 1982, 1997 और 2015 जैसे वर्षों में अल नीनो बेहद मजबूत था, फिर भी सितंबर-अक्टूबर तक अच्छी बारिश दर्ज की गई।
- बदलता पैटर्न: अल नीनो कमजोर होने पर बारिश का दायरा लंबा होता है, जबकि मजबूत होने पर यह टुकड़ों में बरसती है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या होगा असर?
यह जानकारी हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है? सबसे पहले तो किसानों को अपनी बुवाई की रणनीति में बदलाव करना होगा। चूँकि बारिश के दिनों के बीच लंबा गैप (ड्राई स्पेल) हो सकता है, इसलिए जल संरक्षण और सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर ध्यान देना अनिवार्य है।
आम शहरी आबादी के लिए, यह मानसून ‘अनिश्चित’ रह सकता है। छिटपुट बारिश और उमस का सिलसिला जारी रहेगा। घर से बाहर निकलते समय मौसम के अचानक मिजाज बदलने के लिए तैयार रहें। अल नीनो कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक मौसमी चक्र है जिसे समझकर हम आने वाली चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकते हैं।




