कानपुर और आसपास के इलाकों में चिलचिलाती धूप और उमस से परेशान लोगों को आखिरकार राहत मिल ही गई। पिछले 24 घंटों से हो रही रिमझिम बारिश ने पूरे शहर के तापमान को गिरा दिया है, जिससे फिजाओं में एक अलग ही ठंडक घुल गई है।
मौसम का बदला मिजाज: क्या है असली वजह?
झारखंड में बने कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) का सीधा असर कानपुर परिक्षेत्र पर देखने को मिल रहा है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, देहरादून से पलामू तक बनी बादलों की एक लंबी शृंखला वाराणसी होते हुए हमारे क्षेत्र से गुजर रही है। यही वजह है कि मंगलवार को आसमान में घने बादल छाए रहे और सूरज के दर्शन तक नहीं हुए। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की वेधशाला में ‘सन शाइन ऑवर’ शून्य रिकॉर्ड किए गए हैं।
अगले दो दिन रहेंगे अहम
मौसम विभाग का अनुमान है कि नमी का यह सिलसिला अभी थमेगा नहीं। अगले 48 घंटों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा। इस दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में रिमझिम के साथ-साथ तेज बौछारें पड़ने की भी पूरी संभावना है। हवा में नमी का स्तर 90 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जो बारिश के अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रहा है।
शहर के किस इलाके में कितनी बारिश?
- बर्रा: 4.1 मिमी (सबसे अधिक बारिश)
- सिविल लाइंस: 3.8 मिमी
- काकादेव: 3.4 मिमी
- कंपनी बाग: 2.8 मिमी
- सीएसए परिसर: 2.0 मिमी
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
इस बारिश ने जहां एक ओर गर्मी और उमस से जूझ रहे कानपुरवासियों को बड़ी राहत दी है, वहीं खेती-किसानी के लिहाज से भी इसे काफी सकारात्मक माना जा रहा है। तापमान गिरकर 30.2 डिग्री सेल्सियस (अधिकतम) पर पहुंच गया है, जिससे बिजली की खपत में कमी और सामान्य जनजीवन में ताजगी महसूस की जा रही है। हालांकि, सड़क पर चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को अगले दो दिनों तक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि अचानक तेज बारिश का दौर कभी भी शुरू हो सकता है।




