मासूम की बेबसी और पिता की हैवानियत
बांदा की रहने वाली कौशल्या का पांच साल का मासूम बेटा आज भी घर की दहलीज पर टकटकी लगाए बैठा है। उसकी आंखों में एक ही सवाल है—’मम्मी कब आएंगी?’ उसे क्या पता कि जिस पिता का हाथ पकड़कर वह खेलता था, उसी ने शक की आग में जलकर उसकी मां को हमेशा के लिए उससे छीन लिया है। यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि रिश्तों के कत्ल की है जिसने पूरे बांदा और हरिद्वार को हिलाकर रख दिया है।
क्या है पूरा मामला?
कौशल्या की शादी ओमप्रकाश से हुई थी, लेकिन उनके बीच शक की दीवार इतनी ऊंची हो गई थी कि पति जल्लाद बन गया। पुलिस जांच के अनुसार, ओमप्रकाश अपनी पत्नी को बहला-फुसलाकर हरिद्वार ले गया। वहां सुनसान जंगलों में उसने अपने भाई और बहनोई के साथ मिलकर कौशल्या की गला दबाकर हत्या कर दी।
कातिलों ने सबूत मिटाने की ऐसी घिनौनी साजिश रची जिसे जानकर रूह कांप जाए। पहचान छिपाने के लिए उन्होंने कौशल्या के चेहरे पर तेजाब डाल दिया ताकि शव की शिनाख्त न हो सके। उन्होंने लाश को हरिद्वार के जंगलों में ठिकाने लगा दिया और वापस बांदा लौट आए, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
जब महिला घर नहीं लौटी, तो परिजनों को संदेह हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस की तफ्तीश में कड़ियां जुड़ती गईं और मोबाइल लोकेशन व संदिग्ध गतिविधियों ने ओमप्रकाश का सच उगल दिया। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पति ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। फिलहाल, ओमप्रकाश, उसके भाई और बहनोई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
मायने और प्रभाव: समाज के लिए सबक
यह घटना दिखाती है कि पारिवारिक रिश्तों में गहराता अविश्वास और शक किस कदर जानलेवा साबित हो सकता है। एक पल के गुस्से और गलतफहमी ने एक मां को बच्चे से दूर कर दिया और एक परिवार को बर्बाद कर दिया। समाज में लगातार बढ़ रहे घरेलू हिंसा और इस तरह के जघन्य अपराध यह चेतावनी देते हैं कि संवाद की कमी और अनियंत्रित शक का अंत हमेशा विनाशकारी होता है। अब इस पांच साल के बच्चे का भविष्य क्या होगा, यह सवाल पूरे समाज के सामने है।



