आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दौर है और हर तरफ चर्चा है कि क्या यह तकनीक नौकरियां छीन लेगी? इसी डर और दुविधा के बीच आगरा में एक अहम संदेश दिया गया है। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के चेयरमैन प्रो. पंकज अरोड़ा ने साफ किया है कि तकनीक से भागने के बजाय उसे अपनाना ही तरक्की का एकमात्र रास्ता है।
डिग्री ही सब कुछ नहीं, समाज के लिए बनिए प्रेरणा
हाल ही में आयोजित एक दीक्षांत समारोह में शिरकत करते हुए प्रो. अरोड़ा ने युवाओं को जीवन की नई दिशा दिखाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय से मिलने वाली डिग्री केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी का प्रतीक है। उनके अनुसार, छात्रों को अपनी शिक्षा का उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करना चाहिए।
विजन-2047 के सारथी बनेंगे युवा
प्रो. अरोड़ा ने प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के सपने यानी विजन-2047 का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की बागडोर आज की युवा पीढ़ी के हाथों में है।
- नई तकनीक का कौशल: एआई और मशीन लर्निंग जैसी तकनीक को चुनौती नहीं, अवसर मानें।
- सकारात्मक सोच: डिग्री मिलने के बाद सीखने की प्रक्रिया को कभी न रोकें।
- राष्ट्र प्रथम: अपने निजी करियर के साथ देश के विकास में भी योगदान दें।
मायने और प्रभाव: क्या बदल रहा है?
प्रो. पंकज अरोड़ा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के छात्र एआई के आने से अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इस बात के मायने साफ हैं—नौकरियां खत्म नहीं हो रही हैं, बल्कि बदल रही हैं। जो युवा तकनीक को अपने काम में ढाल लेंगे, वही आने वाले दौर में सफल होंगे। यह न केवल छात्रों के लिए, बल्कि शिक्षकों के लिए भी एक बड़ा सबक है कि वे नई पीढ़ी को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर डिजिटल युग के लिए तैयार करें।
