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UP: अग्नि सुरक्षा में बड़ी लापरवाही, 148 अस्पतालों पर गिरी गाज, आयुष्मान भारत सूची से बाहर

अस्पतालों में सुरक्षा से खिलवाड़ पर बड़ा एक्शन

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की जान के साथ हो रहे खिलवाड़ पर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के मानकों को ताक पर रखने वाले प्रदेश के 148 निजी अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। इन अस्पतालों की आयुष्मान भारत योजना से सम्बद्धता (empanelment) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

कैसे हुई पहचान और क्या थी कमी?

हाल ही में लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद शासन ने प्रदेश भर के अस्पतालों का नए सिरे से ऑडिट करने का आदेश दिया था। इस जांच में पाया गया कि कई अस्पतालों ने न केवल फायर एनओसी (NOC) की अनदेखी की थी, बल्कि आपातकालीन निकासी और अग्निशमन यंत्रों के रखरखाव में भी गंभीर कोताही बरती थी।

स्वास्थ्य विभाग ने दो चरणों में जांच की थी:

  • पहला चरण: शुरुआती ऑडिट में कमियां मिलने पर अस्पतालों को सुधार का मौका दिया गया।
  • दूसरा चरण: थर्ड-पार्टी ऑडिट में दोबारा कमियां मिलने के बाद कठोर कदम उठाए गए।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है खास?

यह कार्रवाई सीधे तौर पर आम आदमी की सुरक्षा से जुड़ी है। अस्पताल जैसी जगह पर, जहाँ हर वक्त मरीज और उनके तीमारदार मौजूद होते हैं, अग्नि सुरक्षा की कमी किसी भी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

इस कार्रवाई के मुख्य प्रभाव:

  • दबाव: अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को लेकर अब प्रबंधन पर दबाव बनेगा।
  • सुधार: सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अस्पतालों को अब फायर नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
  • चेतावनी: यह निर्णय उन सभी चिकित्सा संस्थानों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो मुनाफे के चक्कर में मरीजों की सुरक्षा को नजरअंदाज करते हैं।

भविष्य में मरीज के तौर पर किसी भी अस्पताल में भर्ती होने से पहले अब आपको उनकी सुरक्षा व्यवस्था के बारे में सतर्क रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग का यह कदम एक सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की ओर इशारा करता है, लेकिन इसे निरंतर बनाए रखना ही असली चुनौती होगी।

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