कानपुर की सड़कों पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह ने एक ऐसा ‘प्लान’ तैयार किया जिसकी भनक चकेरी और जाजमऊ पुलिस को भी नहीं लगी। नियमों को ताक पर रखकर देर रात शराब परोसने वाले ठेका संचालकों पर पुलिस की यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्राइवेट गाड़ी, सादी वर्दी और अचानक दस्तक
मंगलवार देर रात का समय था। शहर की पुलिसिंग अक्सर ड्यूटी में व्यस्त रहती है, लेकिन इस बार एडीसीपी शिवा सिंह खुद सड़कों पर उतरीं। उन्होंने किसी सरकारी गाड़ी या पुलिस लाव-लश्कर का इस्तेमाल करने के बजाय एक प्राइवेट वाहन चुना। बिना वर्दी के पहुंचीं एडीसीपी को देखकर पहले तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि यह पुलिस है।
कैसे खुला खेल?
- बंदी के नियम धता: शराब बंदी के आदेशों के बावजूद चकेरी और जाजमऊ के ठेकों पर धड़ल्ले से बिक्री जारी थी।
- आंखों में धूल: ठेकों के बाहर पर्दा डालकर अंदर लोगों को शराब पिलाई जा रही थी, ताकि बाहर से किसी को भनक न लगे।
- कार्रवाई: जैसे ही एडीसीपी ने सादे कपड़ों में छापा मारा, वहां मौजूद 12 लोगों के हाथ-पांव फूल गए।
स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस छापेमारी के बाद चकेरी और जाजमऊ थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब एडीसीपी को बंदी के बावजूद शराब बिकने की सूचना मिली, तो स्थानीय बीट पुलिस क्या कर रही थी? क्या मिलीभगत के बिना इतनी हिम्मत की जा सकती है? फिलहाल, पकड़े गए सभी 12 लोगों का चालान किया गया है और आबकारी विभाग को रिपोर्ट भेजकर ठेका संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मायने और प्रभाव
कानपुर के नागरिकों के लिए यह घटना एक बड़ा संकेत है। सार्वजनिक स्थानों पर देर रात शराब पीना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह क्षेत्र की सुरक्षा और शांति के लिए भी खतरा है। ऐसी अचानक कार्रवाई यह संदेश देती है कि कानून का पालन कराने के लिए अब पुलिस नए और सख्त तरीके अपना रही है। आम जनता के लिए यह राहत की बात है कि प्रशासन अब मनमानी करने वाले ठेका संचालकों पर नकेल कसने के मूड में है। आने वाले दिनों में ऐसी और औचक छापेमारी देखने को मिल सकती है, जिससे शहर की व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।




