डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई को नए दौर के साथ जोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब बीटेक के पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अनिवार्य उपस्थिति होगी, साथ ही गणित जैसे जटिल विषय को भी प्रैक्टिकल से जोड़ा जाएगा। यह बदलाव नए शैक्षणिक सत्र से प्रभावी हो रहा है, जिसका उद्देश्य छात्रों को रटने की जगह तकनीक के इस्तेमाल में माहिर बनाना है।
मैथ्स अब सिर्फ थ्योरी नहीं, होगा प्रैक्टिकल
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि आज के दौर में इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए केवल फार्मूले याद करना काफी नहीं है। कुलपति ने स्पष्ट किया है कि अब बाजार में कई उन्नत मैथमेटिकल टूल उपलब्ध हैं। छात्रों को यह पता होना चाहिए कि किस मेथड का उपयोग कहां करना है, जबकि जटिल गणनाओं को हल करने का काम मशीनें करेंगी।
छात्रों और शिक्षकों के लिए तकनीक अनिवार्य
- AI का एकीकरण: इंजीनियरिंग के हर सेमेस्टर में AI से जुड़ी तकनीक का समावेश किया जाएगा।
- प्रैक्टिकल आधारित लर्निंग: गणित के सवालों को सॉल्व करने के लिए अब डिजिटल टूल्स का उपयोग सिखाया जाएगा।
- स्किल-बेस्ड एजुकेशन: यह नई शिक्षा नीति के अनुरूप छात्रों को सीधे इंडस्ट्री-रेडी बनाने की कोशिश है।
मायने और प्रभाव: आम छात्रों के लिए क्यों जरूरी है?
यह बदलाव सीधे तौर पर उन छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगा जो कोडिंग, डेटा साइंस और रोबोटिक्स में करियर बनाना चाहते हैं। अभी तक गणित को बीटेक में सबसे कठिन और थ्योरेटिकल विषय माना जाता था, लेकिन प्रैक्टिकल जुड़ने से न केवल डर कम होगा, बल्कि छात्रों की समस्या सुलझाने की क्षमता (Problem Solving Skills) बढ़ेगी। आने वाले समय में कंपनियां उन्हीं छात्रों को प्राथमिकता देंगी जो तकनीक और गणितीय टूल्स के सटीक तालमेल के साथ काम करना जानते हैं। AKTU का यह कदम छात्रों को भविष्य की ग्लोबल जॉब मार्केट के लिए तैयार करने की एक बड़ी तैयारी है।



