बदायूं में खाकी का खौफ किस कदर कम हो गया है, इसकी बानगी हजरतपुर थाना क्षेत्र में देखने को मिली। जब पुलिस की एक टीम वारंटी आरोपियों को पकड़ने के लिए दियौचरी गांव पहुंची, तो उसे स्थानीय लोगों के भारी विरोध और हिंसक हमले का सामना करना पड़ा। इस दौरान आरोपियों के परिजनों ने पुलिस बल को घेर लिया, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए।
हमले में दरोगा घायल, मची अफरा-तफरी
दबिश देने गई पुलिस टीम पर अचानक हुए इस हमले में एक दरोगा गंभीर रूप से घायल हो गए। भीड़ द्वारा किए गए पथराव और हाथापाई में दरोगा का सिर फूट गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस टीम किसी तरह वहां से संभली और मामले की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई।
सात लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए नामजद कार्रवाई की है। हमलावरों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने और बलवा करने समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
मायने और प्रभाव: कानून व्यवस्था के लिए चुनौती
बदायूं की यह घटना आम जनता और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाती है। इसके कुछ गहरे पहलू हैं:
- घटता भय: पुलिस टीम पर हमला इस बात का संकेत है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और उन्हें कानून का डर नहीं रहा।
- सुरक्षा का सवाल: जब रक्षक ही सुरक्षित नहीं होंगे, तो आम आदमी की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
- सख्ती की जरूरत: ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी कानून को हाथ में लेने की हिम्मत न करे।
स्थानीय लोग अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि गांव में शांति व्यवस्था बहाल की जाए और हमलावरों को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बने।



