आगरा के एत्मादपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीज अब खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने जब अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, तो वहां की बदहाली देख दंग रह गईं। अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और स्वच्छता के दावों की पोल खुल गई है।
गंदगी और आग से सुरक्षा में बड़ी लापरवाही
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में चारों तरफ गंदगी का अंबार मिला, जो मरीजों में संक्रमण फैलाने के लिए काफी है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात फायर सेफ्टी सिस्टम की है। अस्पताल में आग बुझाने के उपकरण या तो नदारद थे या फिर खराब हालत में पड़े थे। किसी भी बड़ी अनहोनी की स्थिति में यहां का सिस्टम पूरी तरह नाकाम साबित हो सकता था।
आयोग ने दी कड़ी चेतावनी
बबीता चौहान ने मौके पर मौजूद अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य केंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और फायर सेफ्टी नॉर्म्स को मानकों के अनुरूप अपडेट करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

खोई हुई महिला को परिवार से मिलवाने की पहल
इस निरीक्षण के दौरान एक मानवीय पहलू भी सामने आया। महिला संरक्षण गृह में पिछले दो साल से रह रही औरैया की एक महिला की व्यथा सुनकर अध्यक्ष ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को महिला को उसके परिवार से मिलाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तेज करने का आदेश दिया है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी?
इस घटना का सीधा असर आगरा के स्थानीय लोगों पर पड़ता है। सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति अक्सर गरीबों की जान पर भारी पड़ती है। इस सख्ती के बाद अब उम्मीद है कि:
- बेहतर स्वास्थ्य सेवा: अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनेगा, जिससे स्वच्छता और सुविधाओं में सुधार होगा।
- सुरक्षा ऑडिट: फायर सेफ्टी में सुधार होने से मरीजों और उनके परिजनों का जीवन सुरक्षित होगा।
- जवाबदेही तय: महिला आयोग का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी।
क्या आप भी किसी सरकारी अस्पताल में सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।




