मंदिर की जमीन पर घमासान, समाधि लेने गड्ढे में उतरे महंत
बदायूं जिले के लभारी गांव से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां रामजानकी मंदिर की जमीन को लेकर उपजा विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मंदिर के महंत प्रयागदास ने प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में खुद को एक गड्ढे में बैठा लिया और जीवित समाधि लेने की जिद पर अड़ गए।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ मंदिर से सटी हुई वह जमीन है जिसे प्रशासन द्वारा पट्टे पर देने की तैयारी की जा रही है। रविवार को जब राजस्व विभाग की टीम जमीन की पैमाइश (नाप-जोख) करने पहुंची, तो महंत ने इसका कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि यह जमीन मंदिर की है और इसे किसी भी सूरत में पट्टे पर नहीं दिया जा सकता।
प्रशासन के खिलाफ आक्रोश
महंत प्रयागदास का आरोप है कि मंदिर की संपत्ति को गलत तरीके से दूसरों को आवंटित किया जा रहा है। विरोध स्वरूप उन्होंने जमीन पर ही गड्ढा खोदा और उसमें जाकर बैठ गए। इस घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और भारी संख्या में ग्रामीण भी मंदिर परिसर में जमा हो गए। स्थानीय पुलिस और राजस्व अधिकारी मौके पर स्थिति को संभालने के लिए पहुंचे हैं।
मायने और प्रभाव
इस घटना ने बदायूं के स्थानीय प्रशासन और भू-माफियाओं के बीच के गठजोड़ पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- धार्मिक आस्था बनाम कानूनी पेंच: मंदिर की जमीनों के मालिकाना हक को लेकर अक्सर विवाद होते हैं, जो कई बार कानून और आस्था के बीच सीधी जंग बन जाते हैं।
- प्रशासनिक लापरवाही: पैमाइश के दौरान हुई यह घटना दिखाती है कि स्थानीय प्रशासन विवादित जमीनों के मामले में कितना संवेदनशील है।
- जन-भागीदारी: महंत के इस कदम के बाद स्थानीय लोगों का जुटना यह बताता है कि गांव के लोग मंदिर की जमीन को लेकर कितने भावुक हैं, जो भविष्य में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।





