उत्तर प्रदेश में आज 29 अक्टूबर की सुबह एक ओर करवा चौथ के त्योहार की खुशियां और परंपराएं देखने को मिलीं, तो दूसरी ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई सड़क हादसों की खबरों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जहां महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रख रही हैं, वहीं बिजनौर और पीलीभीत जैसे जिलों में सड़क दुर्घटनाओं ने कई परिवारों से उनका सुहाग और अपनों को छीन लिया है।
सड़क हादसों में उजड़ी खुशियां
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आज सुबह से ही दर्दनाक हादसों की खबरें सामने आई हैं। बिजनौर के हरिद्वार-काशीपुर हाईवे पर एक भीषण सड़क दुर्घटना में 35 वर्षीय बबीत कुमार की जान चली गई। वे करवा चौथ के दिन घर लौट रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
इसी तरह, पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र में ट्रैक्टर और बाइक की भिड़ंत में दो युवकों की मौत हो गई। ये युवक मजदूरी करके घर लौट रहे थे। शामली के झिंझाना इलाके में भी मेरठ-करनाल हाईवे पर पिकअप और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में 23 वर्षीय फुरकान ने दम तोड़ दिया, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।

करवा चौथ: त्याग और आस्था की मिसाल
सड़क हादसों के दुख के बीच, करवा चौथ की अनोखी कहानियाँ भी सामने आ रही हैं। मेरठ से ऐसी खबरें आई हैं जहां चार पत्नियों ने अपने पतियों को किडनी और लिवर दान कर उन्हें नया जीवन दिया है। यह कहानी साबित करती है कि ‘अर्द्धांगिनी’ का अर्थ सिर्फ साथ रहना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में ढाल बनना भी है। वहीं, प्रदेश भर में सुहागिन महिलाएं पारंपरिक श्रद्धा के साथ चांद के दीदार और पूजा की तैयारियों में जुटी हैं।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल
वाराणसी एमएलसी चुनाव की मतगणना पर भी सबकी नजरें टिकी हैं, जहां आशुतोष सिन्हा ने शुरुआती रुझानों में बड़ी बढ़त बना ली है। वहीं, कानपुर में बारादेवी मंदिर अग्निकांड के विरोध में व्यापारियों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला है। अयोध्या में मानदेय न मिलने से नाराज सफाई कर्मचारियों ने काम रोक दिया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।
मायने और प्रभाव
आज की खबरें उत्तर प्रदेश के आम नागरिक के लिए दो बड़े संकेत देती हैं:
- सड़क सुरक्षा पर सवाल: त्योहारों के सीजन में सड़कों पर बढ़ रहा यातायात और लापरवाही से हो रही मौतें प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। यात्रियों को रात के समय सफर करते वक्त अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
- संसाधन और जवाबदेही: अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण शहरों में सफाई कर्मचारियों का हड़ताल पर जाना सरकारी तंत्र की खामियों को उजागर करता है। यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा मुद्दा है जिसे जल्द हल करना जरूरी है।





