सोलह श्रृंगार, हाथों में रची मेहंदी और पति की लंबी उम्र की कामना लिए सुहागिनें आज करवा चौथ का महापर्व मना रही हैं। उत्तर भारत में आस्था का यह सबसे बड़ा दिन माना जाता है, जहाँ महिलाएं बिना अन्न-जल ग्रहण किए पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं।
करवा चौथ का धार्मिक महत्व और आस्था
करवा चौथ का व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। आज सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। महिलाएं अपनी सास द्वारा दी गई ‘सरगी’ ग्रहण कर दिन की शुरुआत कर चुकी हैं, और अब चांद निकलने का इंतजार है।
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
आज का दिन विशेष है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:36 से 06:54 तक रहेगा। इस दौरान महिलाएं भगवान गणेश, शिव-पार्वती और कार्तिकेय की पूजा कर अपने सुहाग की सलामती की प्रार्थना करेंगी।

- पूजा का समय: शाम 05:36 बजे से
- चंद्रोदय का समय: क्षेत्र के अनुसार रात्रि 08:15 के आसपास
मायने और प्रभाव: आम जीवन पर असर
इस पर्व का सामाजिक महत्व बहुत गहरा है। करवा चौथ न केवल पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूती देता है, बल्कि यह परिवारों के मिलन का भी जरिया बनता है। बाजारों में रौनक है, और आज के दिन विशेष रूप से महिलाओं के सजने-संवरने से स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी उत्साह देखा जा रहा है। परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के साथ यह दिन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे रिश्तों की डोर और भी मजबूत होती है।



