इस साल करवा चौथ का पर्व महज एक परंपरा नहीं, बल्कि खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। सुहागिनें जब अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखेंगी, तब आसमान में पांच दुर्लभ शुभ योगों का अद्भुत मेल बन रहा होगा।
इस बार के पांच महासंयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल करवा चौथ पर लक्ष्मी-नारायण योग, त्रिग्रही योग, शुक्रादित्य योग, और गौरी योग का अद्भुत मेल देखने को मिलेगा। ये संयोग सदियों में एक बार बनते हैं और वैवाहिक जीवन में मिठास और सुख-समृद्धि लाने वाले माने जाते हैं।
पूजा और चंद्रोदय का समय
व्रत रखने वाली महिलाओं को विशेष रूप से चंद्रोदय के समय का ध्यान रखना चाहिए। विभिन्न शहरों के अनुसार चंद्रोदय का समय थोड़ा भिन्न हो सकता है, लेकिन औसतन शाम 8:15 बजे से 8:45 बजे के बीच चंद्रमा के दर्शन हो जाएंगे।

- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:30 से 6:45 बजे तक।
- चंद्र दर्शन: अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की जांच अवश्य करें।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों है अहम
इस बार का करवा चौथ आर्थिक और पारिवारिक शांति की दृष्टि से अत्यंत फलदायी है। लक्ष्मी-नारायण राजयोग का निर्माण सीधे तौर पर घर में धन और वैभव के आगमन का संकेत देता है। यदि आप भी अपने रिश्ते में नई ऊर्जा और स्थायित्व चाहते हैं, तो इन शुभ मुहूर्त में की गई पूजा का प्रभाव कई गुना अधिक होगा। यह न केवल आस्था का विषय है, बल्कि एक-दूसरे के प्रति विश्वास और समर्पण को मजबूत करने का भी अवसर है।



