आगरा में सरकारी कामकाज की सुस्ती अब अफसरों के लिए मुसीबत बन गई है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट्स और लोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले विभागों पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कड़ा रुख अपना लिया है। हालिया समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़े सरकारी मशीनरी की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
क्यों मचा है हड़कंप?
सीएम डैशबोर्ड पर जिले की रैंकिंग में गिरावट के बाद डीएम मनीष बंसल ने कड़ी नाराजगी जताई है। समीक्षा के दौरान पाया गया कि जननी सुरक्षा योजना और फैमिली आईडी बनाने के काम में आगरा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। इन महत्वपूर्ण योजनाओं में जिले को ‘सी’ श्रेणी मिली है, जो सीधे तौर पर आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं में देरी को दर्शाता है।
बैंक लिंकेज में भी बदतर हालात
सिर्फ जननी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि ‘डे-एनआरएलएम’ बैंक क्रेडिट लिंकेज में भी जिले की स्थिति काफी कमजोर रही है। इस योजना में जिले को ‘डी’ श्रेणी में रखा गया है। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया है कि जनता के काम में देरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मायने और प्रभाव: आम आदमी को क्या नुकसान?
इस सख्ती के पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि ये योजनाएं सीधे गरीब और मध्यम वर्ग से जुड़ी हैं:
- जननी सुरक्षा योजना: प्रसूता महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक मदद और स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर नहीं पहुंचने से सीधा असर नवजात और मां की सेहत पर पड़ता है।
- फैमिली आईडी: राज्य सरकार की तमाम सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए यह डिजिटल पहचान पत्र अनिवार्य है, इसके बिना लोग सरकारी योजनाओं से वंचित रह रहे हैं।
- क्रेडिट लिंकेज: अगर बैंक लोन में देरी होती है, तो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का स्वरोजगार का सपना वहीं दम तोड़ देता है।
डीएम की यह कार्रवाई संदेश देती है कि सरकारी फाइलों में कैद योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहकर आम आदमी की चौखट तक पहुंचना जरूरी है। अब देखना यह होगा कि नोटिस का जवाब देने के बाद इन विभागों की कार्यप्रणाली में कितना सुधार आता है।


