कानपुर के गोविंदनगर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बंधन बैंक के उप प्रबंधक अनुराग बाजपेई ने अपनी जान दे दी, लेकिन मरने से पहले उन्होंने जो सुसाइड नोट छोड़ा, उसने बैंक के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार और प्रताड़ना की एक ऐसी परत खोली है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मूल रूप से उन्नाव के रहने वाले 34 वर्षीय अनुराग बाजपेई बंधन बैंक की गोल्ड लोन शाखा में बतौर उप प्रबंधक कार्यरत थे। अनुराग के साले राम कृष्ण भट्टाचार्य की शिकायत पर बाबूपुरवा थाने में बैंक की रीजनल मैनेजर सुभांगी त्रिपाठी समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
आरोप है कि अनुराग को पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर पहले उनके सैलरी चेक हथियाए गए। इसके बाद उन्हें फर्जी गोल्ड लोन के जाल में फंसाकर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। सुसाइड नोट में इन आरोपियों की करतूतों का पूरा कच्चा-चिट्ठा लिखा है।

ब्लैकमेलिंग और लाखों का खेल
पुलिस की शुरुआती जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाली हैं:
- आरोपी शिवम सिंह और प्रबल माहेश्वरी पर जुआ और सट्टेबाजी में अनुराग को जबरन फंसाने का आरोप है।
- अनुराग पर 15 लाख रुपये के लेनदेन के नाम पर प्रतिदिन चक्रवृद्धि ब्याज लगाकर वसूली की जा रही थी।
- गोल्ड फाइनेंस कंपनी के जरिए 3.96 लाख रुपये का गबन किया गया और इसका सारा ठीकरा अनुराग पर फोड़ने की कोशिश की गई।
- सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन तमाम गतिविधियों की जानकारी रीजनल मैनेजर सुभांगी त्रिपाठी को थी, फिर भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी।
मायने और प्रभाव: आम आदमी के लिए सबक
यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह कॉरपोरेट जगत की उस बदसूरत सच्चाई को उजागर करती है जहां टारगेट और दबाव के नाम पर कर्मचारियों को मानसिक रूप से तोड़ दिया जाता है। बैंक जैसे संस्थान में जहां आम जनता अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखती है, वहां अंदरूनी स्तर पर ऐसे गिरोहों का सक्रिय होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।
इस मामले ने एक बार फिर से बैंकिंग सेक्टर में कार्यस्थल के माहौल और सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। क्या एक कर्मचारी अपनी जान से बढ़कर बैंक के टारगेट और ब्लैकमेलिंग के बोझ तले दबता रहेगा? पुलिस की जांच अब इस दिशा में बढ़ रही है कि क्या यह सिर्फ अनुराग तक सीमित था, या अन्य कर्मचारी भी इस तरह के शोषण का शिकार हो रहे हैं।



