मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके को दहला देने वाले ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। सौरभ राजपूत हत्याकांड में पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। 163 पेज के इस ऐतिहासिक फैसले में जज ने न केवल अपराध की क्रूरता को रेखांकित किया, बल्कि कानून की अहमियत पर भी गहरा संदेश दिया।
बाघ और जंगल का उदाहरण, कानून की सीख
सजा सुनाते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत के एक श्लोक—‘निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्’ का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह बाघ के बिना जंगल सुरक्षित नहीं रहता और जंगल के बिना बाघ, ठीक उसी तरह समाज में कानून का होना मनुष्यों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। जज ने स्पष्ट किया कि न्याय का धर्म तभी पूरा होता है जब अपराधी को उसके कृत्य की गंभीरता के अनुसार दंड मिले।
क्या था पूरा मामला?
सौरभ राजपूत अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए लंदन में मेहनत कर रहा था और अपनी पत्नी मुस्कान को पैसे भेजता था। इस दौरान मुस्कान ने न केवल पति को धोखा दिया, बल्कि अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
- क्रूरता की हदें: हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले ड्रम में सीमेंट से चिन दिया गया।
- बेपरवाही: हत्या के बाद आरोपी हिमाचल प्रदेश में मौज-मस्ती करने निकल गए।
- कानूनी प्रक्रिया: पुलिस ने 54 दिन में 1000 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। मामले में 22 गवाहों के बयान और 590 दिनों की लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला आया है।
मुस्कान की दलील और कोर्ट का रुख
सजा सुनाए जाने से ठीक पहले, जब कोर्ट ने मुस्कान से उसकी आखिरी इच्छा पूछी, तो उसने अपनी दो बेटियों का हवाला देकर रहम की अपील की। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इसे खारिज करते हुए कहा कि हत्या के समय और उसके बाद जेल में रहने के दौरान उसे अपनी बेटियों की याद नहीं आई, यह केवल मौत के डर से किया गया दिखावा है।
मायने और प्रभाव
यह फैसला समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि पारिवारिक रिश्तों की आड़ में होने वाले जघन्य अपराधों को कानून कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। इस मामले में ‘शून्य पश्चाताप’ (No Remorse) को आधार बनाकर दी गई फांसी की सजा यह दर्शाती है कि यदि कोई अपराधी समाज के लिए खतरा है, तो न्यायपालिका अपनी पूरी कठोरता के साथ निर्णय लेगी। यह केस भविष्य के लिए एक नजीर बना रहेगा, जहाँ भावनाओं से ऊपर कानून की मर्यादा और न्याय की स्थापना को रखा गया है।




