क्या आप भी सफर के दौरान एसी स्लीपर बसों में खिड़की के पास बैठकर या गैलरी में चादर बिछाकर सोते हैं? अगर हाँ, तो सावधान हो जाइए। कानपुर में लगातार सामने आ रहे बस हादसों के बाद प्रशासन अब सख्त हो गया है। हाल ही में भौंती बाईपास पर डीसीपी ट्रैफिक अभयनाथ त्रिपाठी ने एसी और स्लीपर बसों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें सुरक्षा के बड़े दावे हवा-हवाई साबित हुए।
सफर के दौरान सुरक्षा से खिलवाड़: क्या मिला जांच में?
भौंती बाईपास पर रुकवाई गई कई बसों का हाल देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा से जुड़ी गंभीर लापरवाही सामने आई हैं:
- इमरजेंसी विंडो का गायब होना: ज्यादातर बसों में आपातकालीन खिड़कियां पर्दों से ढकी थीं, जिसका मतलब है कि आपात स्थिति में यात्री बाहर नहीं निकल पाएंगे।
- फायर सेफ्टी फेल: कई बसों में आग बुझाने वाले उपकरण (फायर एक्सटिंग्विशर) नदारद मिले।
- ओवरलोडिंग का खेल: लंबी दूरी की बसों में क्षमता से अधिक यात्री ठूंसे गए थे और लोग गैलरी में चादर बिछाकर सोते पाए गए, जो किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।
चालकों और परिचालकों के लिए सीधी चेतावनी
डीसीपी ट्रैफिक ने सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि अब बस में चढ़ते ही यात्रियों को ‘एयरलाइन’ की तरह सुरक्षा नियमों और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एक्जिट) के बारे में जानकारी दी जाए। प्रशासन ने दो टूक कहा है कि अगर अगली जांच में यात्रियों ने बताया कि उन्हें सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं दी गई, तो चालक और परिचालक सीधे जेल भेजे जाएंगे। इसके साथ ही कई बसों में अवैध रूप से लगे प्रेशर हॉर्न भी हटाए गए और पांच बसों के खिलाफ कड़ी प्रवर्तनात्मक कार्रवाई की गई है।
मायने और प्रभाव: आम जनता को क्या समझना चाहिए?
यह कार्रवाई महज चालान काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी जान की सुरक्षा का सवाल है। अक्सर लंबी दूरी के सफर में यात्री थकान के कारण सो जाते हैं, और बस में सुरक्षा मानकों की कमी जानलेवा साबित होती है। यात्रियों को चाहिए कि वे बस में बैठते ही इमरजेंसी विंडो की लोकेशन देखें और यदि बस ओवरलोडेड है, तो इसकी शिकायत करें। प्रशासन का यह कदम कानपुर के उन हजारों यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है जो रोजाना असुरक्षित बसों में सफर करने को मजबूर हैं।



