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कानपुर: शिकायतों के निस्तारण में फिसड्डी विभाग हो जाएं सावधान, DM महेंद्र सिंह तंवर ने दिए कड़े निर्देश

कानपुर में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने वाले आम लोगों के लिए राहत की खबर है। शहर में जन शिकायतों के निस्तारण की धीमी रफ्तार को देखते हुए जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कड़ा रुख अपनाया है। विकास भवन में औचक निरीक्षण के दौरान डीएम ने साफ कर दिया है कि अब फाइलों की लेटलतीफी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आईजीआरएस रैंकिंग सुधारने के लिए नई रणनीति

विकास भवन पहुंचे जिलाधिकारी ने डीआरडीए, पंचायती राज, कृषि और डूडा समेत कई प्रमुख विभागों का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा जोर आईजीआरएस (IGRS) रैंकिंग में सुधार पर दिया। डीएम ने निर्देश दिए हैं कि हर विभाग में शिकायतों के निस्तारण के लिए समर्पित स्टाफ तैनात किया जाए, ताकि जनता की समस्याओं का समय पर और गुणवत्तापूर्ण समाधान हो सके।

जवाबदेही तय करने के स्पष्ट निर्देश

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर काम करने के निर्देश दिए हैं:

  • समयबद्ध निस्तारण: लंबित प्रकरणों को तय समयसीमा के भीतर निपटाना अनिवार्य है।
  • पारदर्शिता: समाज कल्याण विभाग जैसे दफ्तरों में कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था ऐसी हो जिससे कामकाज में पारदर्शिता दिखे।
  • नियमित समीक्षा: अनावश्यक रूप से लटकी फाइलों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी और नियमित तौर पर फाइलों की मॉनिटरिंग होगी।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या बदलेगा?

कानपुर के जिलाधिकारी के इस कदम का सीधा असर जमीनी स्तर पर दिखने की उम्मीद है। अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी शिकायतों को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज तो कराते हैं, लेकिन समाधान के नाम पर उन्हें महीनों भटकना पड़ता है। डीएम के इस निर्देश के बाद सरकारी महकमों पर दबाव बढ़ेगा।

यदि विभाग शिकायतों को प्राथमिकता के साथ निपटाते हैं, तो सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक अधिक तेजी से पहुंचेगा। प्रशासनिक अमले में व्याप्त सुस्ती को दूर करने की यह कवायद अगर सफल रहती है, तो कानपुर की प्रशासनिक दक्षता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। अब गेंद अधिकारियों के पाले में है कि वे जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।

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