आज का दिन सुहागिनों के लिए बेहद खास है। साल भर जिस दिन का इंतजार रहता है, वह करवाचौथ आखिरकार आ गया है। मेरठ से लेकर देशभर के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है, जहां महिलाओं ने सोलह श्रृंगार के लिए चूड़ियों और सौंदर्य प्रसाधनों की जमकर खरीदारी की है। ब्यूटी पार्लरों में भीड़ बताती है कि यह त्योहार सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि एक उत्सव बन गया है।
चांद के दीदार का सही समय
इस बार करवाचौथ पर चंद्रमा का इंतजार कर रही महिलाओं के लिए मुख्य समय रात 8:09 बजे का है। इस समय के आसपास चांद के दर्शन की उम्मीद है। हालांकि, मौसम का मिजाज अगर थोड़ा भी बिगड़ा, तो महिलाओं की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, हमारे पास आपके लिए ज्योतिषीय समाधान मौजूद हैं।
बादलों ने दी दस्तक तो क्या करें?
अगर आज रात बादलों के कारण चांद दिखाई न दे, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, विकल्प मौजूद हैं:
- ईशान कोण में करें पूजन: रात 8:09 बजे के बाद पूर्व दिशा या ईशान कोण की ओर मुख कर के विधि-विधान से पूजा करें।
- प्रतीकात्मक चंद्र पूजन: चावल की वेदी पर चंद्रमा की आकृति बनाएं और उसी का पूजन कर अर्घ्य दें।
- ईश्वर का स्मरण: अगर चंद्रमा न दिखे, तो भगवान शिव, लक्ष्मी-नारायण और अपने पितरों का ध्यान करें।
मायने और प्रभाव
करवाचौथ का व्रत सिर्फ पति की लंबी उम्र की कामना के लिए नहीं है, यह परिवार में प्रेम और सामंजस्य बढ़ाने का एक माध्यम भी है। आचार्य कौशल वत्स का कहना है कि यदि चांद न दिखे तो भी व्रत का संकल्प अधूरा नहीं रहता। इस दिन सास-ससुर को थाली परोसने की परंपरा हमें अपने बड़ों का सम्मान करना सिखाती है। याद रखें, इस व्रत का असली आधार आपका दृढ़ संकल्प और श्रद्धा है। यदि घर में कोई बड़ा न हो, तो किसी जरूरतमंद को भोजन कराकर भी आप व्रत का फल प्राप्त कर सकते हैं। यह त्योहार हमें धैर्य रखना और विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर भरोसा करना सिखाता है।

