गोरखपुर के अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान में इन दिनों एक ही नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है। वह कोई वीआईपी मेहमान नहीं, बल्कि चिड़ियाघर का इकलौता हाथी ‘गंगा प्रसाद’ है। अपनी अठखेलियों, कभी नटखट शरारतों तो कभी अचानक आने वाले गुस्से से गंगा प्रसाद न सिर्फ पर्यटकों का ध्यान खींच रहा है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी छा गया है।
मस्ती और ‘मस्त’ का अनोखा मेल
प्राणी उद्यान के जानकारों की मानें तो हाथियों में ‘मस्त’ नाम की एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, जो उनके किशोरावस्था के दौरान देखने को मिलती है। इस दौरान गंगा प्रसाद के व्यवहार में अक्सर आक्रामकता और चिड़चिड़ापन दिख जाता है, जो उसकी बढ़ती उम्र का एक अहम हिस्सा है। हालांकि, उसके इस बदले हुए व्यवहार को संभालने के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने कमर कस रखी है।
खास देखभाल और लग्जरी इंतजाम
गंगा प्रसाद महज एक जानवर नहीं, बल्कि चिड़ियाघर का लाडला है। उसे गर्मी से बचाने के लिए उसके बाड़े में खास तौर पर फव्वारे की व्यवस्था की गई है। शहर का यह इकलौता जानवर है, जिसे इस तरह की सुविधा मिली है।
- विशेष टीम: गंगा प्रसाद के व्यवहार पर 24 घंटे निगरानी रखने के लिए अनुभवी महावतों और वेटनरी डॉक्टरों की एक टीम तैनात रहती है।
- आहार और स्वास्थ्य: उसके स्वास्थ्य और मूड को ध्यान में रखते हुए उसके डाइट चार्ट में नियमित बदलाव किए जाते हैं।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: जब हाथी ‘मस्त’ की स्थिति में होता है, तो सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं ताकि पर्यटक सुरक्षित दूरी से उसका दीदार कर सकें।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों है जरूरी?
गंगा प्रसाद का व्यवहार हमें यह समझने का मौका देता है कि वन्यजीवों और इंसानों के बीच का रिश्ता कितना नाजुक होता है। गोरखपुर चिड़ियाघर का यह प्रयास बताता है कि कैसे आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के जरिए हम जानवरों को न केवल कैद में रखते हैं, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ वातावरण भी देते हैं। गंगा प्रसाद को देखना न सिर्फ एक रोमांचक अनुभव है, बल्कि यह बच्चों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक भी करता है। अगर आप गोरखपुर में हैं, तो इस नटखट हाथी की एक झलक लेना आपके वीकेंड को खास बना सकता है।


