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गोरखपुर एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान के साथ बड़ा हादसा, लैंडिंग के दौरान टेल स्ट्राइक, उड़ानें प्रभावित

हवाई सफर को सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन जब अचानक खबर आए कि लैंडिंग के दौरान विमान जमीन से टकरा गया, तो यह यात्रियों और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। गोरखपुर एयरपोर्ट पर इंडिगो की एक उड़ान के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जिससे न केवल विमान को नुकसान पहुंचा, बल्कि सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या हुआ था गोरखपुर रनवे पर?

यह घटना उस समय हुई जब इंडिगो की फ्लाइट अपनी नियमित उड़ान के बाद गोरखपुर एयरपोर्ट पर लैंड कर रही थी। लैंडिंग की प्रक्रिया के दौरान विमान का पिछला हिस्सा, जिसे तकनीकी भाषा में ‘टेल’ (Tail) कहा जाता है, रनवे की सतह से जोर से टकरा गया। विमानन विशेषज्ञों की भाषा में इसे ‘टेल स्ट्राइक’ (Tail Strike) कहते हैं।

विमान के जमीन से टकराते ही पायलट ने विमान को नियंत्रित किया, लेकिन इस झटके ने विमान के ढांचे को नुकसान पहुंचाया। गनीमत यह रही कि इस घटना में सभी यात्री सुरक्षित बच गए और कोई बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

जांच के बाद विमान को किया गया ग्राउंडेड

हादसे की सूचना मिलते ही गोरखपुर एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया। तकनीकी टीम ने तुरंत विमान का निरीक्षण किया। प्राथमिक जांच में पाया गया कि विमान का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।

  • विमान की सुरक्षा को देखते हुए उसे तुरंत ‘ग्राउंडेड’ कर दिया गया है।
  • डीजीसीए (DGCA) के नियमों के तहत पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
  • इंजीनियर्स की टीम यह पता लगा रही है कि क्या यह मानवीय चूक थी या तकनीकी खराबी।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?

गोरखपुर जैसे बढ़ते हुए एयरपोर्ट्स के लिए यह घटना सुरक्षा प्रोटोकॉल की कड़ाई से पालना करने का संकेत है। विमानन क्षेत्र में ‘टेल स्ट्राइक’ अक्सर गलत लैंडिंग एंगल या तेज हवाओं के कारण होती है। आम यात्री के तौर पर, यह खबर आपको यह सोचने पर मजबूर करती है कि फ्लाइट की सुरक्षा में छोटे-छोटे तकनीकी पहलुओं का कितना बड़ा महत्व है।

फिलहाल, यात्रियों को हुई असुविधा के बाद वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गोरखपुर एयरपोर्ट पर पायलटों के लिए लैंडिंग प्रोटोकॉल और कड़े किए जा सकते हैं। एयरलाइंस की जवाबदेही तय होना अब अनिवार्य हो गया है ताकि हवाई सफर का भरोसा बरकरार रहे।

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