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बरसात में सांस लेना हुआ मुश्किल? प्रदूषण और पेड़ों की कमी के बीच डॉक्टर ने दी चेतावनी

बरसात का मौसम उमस और तपन से राहत तो देता है, लेकिन इस बार यह मौसम अपने साथ सेहत के लिए बड़ी चुनौतियां लेकर आया है। अस्पताल की ओपीडी में सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी और सीने में जकड़न की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में अचानक उछाल देखा गया है। आखिर बारिश की बूंदों के बीच हवा में घुला यह जहर कहां से आ रहा है?

पेड़ों की कटाई और बिगड़ती हवा

शहरों में अंधाधुंध हो रही पेड़ों की कटाई इसका सबसे बड़ा कारण है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बॉटनी डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ों की कमी के कारण हवा को प्राकृतिक रूप से साफ करने वाली ‘फिल्टर मशीनें’ खत्म हो रही हैं। पेड़ों के अभाव में बारिश के दौरान सड़कों की धूल और नमी मिलकर हवा में भारी कणों को रोक लेते हैं, जो सीधे फेफड़ों में जाकर परेशानी पैदा करते हैं।

सांस की बीमारी के लक्षण, जिन्हें न करें नजरअंदाज

अगर आपको या आपके परिवार में किसी को नीचे दिए गए लक्षण दिख रहे हैं, तो इसे सामान्य वायरल न समझें:

  • लगातार सूखी खांसी या सांस फूलना।
  • सीने में भारीपन और जकड़न महसूस होना।
  • रात के समय सोते वक्त सांस लेने में घरघराहट।
  • धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही छींकें आना।

मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?

इस समस्या के सीधे तौर पर दो बड़े असर हैं। पहला, यह उन लोगों के लिए खतरनाक है जिन्हें पहले से ही अस्थमा या एलर्जी की समस्या है, क्योंकि नमी से पनपने वाले ‘मोल्ड’ और फंगस सांस की नली में सूजन पैदा कर रहे हैं। दूसरा, दीर्घकालिक रूप से यह हमारे फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम कर रहा है। आने वाले दिनों में अगर हमने हरियाली पर ध्यान नहीं दिया, तो ये मौसमी बीमारियां क्रोनिक समस्याओं में बदल सकती हैं। डॉक्टर की सलाह है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें और यदि सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो, तो तुरंत स्पेशलिस्ट से संपर्क करें।

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