दामाद मैं और मौज तुम्हारी, जब अटल जी पर बड़े भाई ने कसा तंज
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि सादगी और हास्य की एक जिंदा मिसाल थे। आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर देश उन्हें याद कर रहा है। राजनीति की गहमागहमी के बीच उनका एक चेहरा ऐसा भी था जो महफिल में जान डाल देता था। उनका उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक गहरा और निजी रिश्ता था, जो उनके बड़े भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी की ससुराल थी।
गोरखपुर से क्यों था इतना लगाव?
अटल जी अक्सर गोरखपुर का दौरा किया करते थे। राजनैतिक बैठकों के बहाने वे अपने पारिवारिक रिश्तों को निभाने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। उस दौरान गोरखपुर के लोग और उनके रिश्तेदार उन्हें एक कद्दावर नेता से ज्यादा अपने परिवार के सदस्य की तरह देखते थे। वे वहां की गलियों और स्थानीय खान-पान के इतने मुरीद थे कि अक्सर बिना किसी लाव-लश्कर के वहां पहुंच जाते थे।
वो मशहूर किस्सा: जब भाई ने की मस्ती
अटल जी के रिश्तेदार आज भी एक किस्सा सुनाते हैं जो उनके जिंदादिल व्यक्तित्व को बयां करता है। हुआ यूं कि गोरखपुर में अटल जी का इतना भव्य स्वागत होता था कि लोग उनके बड़े भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी को भूल जाते थे। तब उनके भाई ने मुस्कुराते हुए चुटकी ली थी, ‘ससुराल मेरी है, दामाद मैं हूं, लेकिन सारी खातिरदारी और मौज तो तुम उड़ा रहे हो।’ अटल जी ने भी इसे खूब ठहाकों के साथ स्वीकार किया था।
मायने और प्रभाव
अटल बिहारी वाजपेयी का यह मानवीय पक्ष हमें बताता है कि सत्ता के ऊंचे पदों पर बैठने के बावजूद व्यक्ति अपनी जड़ों और रिश्तों से कैसे जुड़ा रह सकता है। उनकी सादगी का ही असर था कि विरोधी भी उनका सम्मान करते थे। आज के दौर में जब नेता अक्सर जनता से दूर होते जा रहे हैं, अटल जी का गोरखपुर के प्रति लगाव और अपने परिवार के साथ उनकी हंसी-मजाक की केमिस्ट्री हमें सिखाती है कि राजनीति में भी संवेदनशीलता कितनी जरूरी है। यही वो जड़ें थीं जिसने उन्हें भारत का ‘अजातशत्रु’ बनाया।


