गोरखपुर यूनिवर्सिटी की व्यवस्था पर उठे सवाल
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में व्यवस्थाओं को लेकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का पारा चढ़ा हुआ है। दीक्षांत समारोह के मंच से राज्यपाल ने न केवल विश्वविद्यालय की कमियों को उजागर किया, बल्कि कैंपस में बाहर से आने वाले टिफिन और बाहरी लोगों की आवाजाही पर बड़ी चिंता जताई है।
राज्यपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कैंपस की सुरक्षा और खान-पान व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं रहा, तो यह सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, ‘अगर टिफिन बाहर से आएगा, तो उसमें ड्रग्स भी आएगा।’
निरीक्षण में दिखी बदहाली
अपने हालिया निरीक्षण का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने खुद विश्वविद्यालय के छात्रावासों और कैंपस की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया है। निरीक्षण के दौरान उन्हें जो कमियां मिलीं, उसे लेकर उन्होंने प्रशासन को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने साफ कहा कि कमियों को छिपाने से कोई फायदा नहीं है। जो गलत है, उसे सुधारा जाना चाहिए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नसीहत देते हुए कहा कि यदि हम अपनी कमियां ही नहीं स्वीकार करेंगे, तो छात्रों को एक बेहतर माहौल कैसे दे पाएंगे?
मायने और प्रभाव: आम छात्रों के लिए क्यों जरूरी?
राज्यपाल की यह नाराजगी सामान्य नहीं है। इसके गंभीर मायने हैं:
- सुरक्षा का सवाल: कैंपस में बिना जांच के बाहर का खाना और बाहरी व्यक्तियों का आना सुरक्षा के मानकों को शून्य करता है।
- अनुशासन की कमी: प्रदेश के बड़े विश्वविद्यालयों में अव्यवस्था का होना शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है।
- जवाबदेही तय करना: राज्यपाल की सीधी टिप्पणी यह संकेत है कि अब गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारियों को ‘चलता है’ की संस्कृति से बाहर निकलकर जवाबदेही तय करनी होगी।
यह मामला केवल एक टिफिन का नहीं, बल्कि कैंपस में मादक पदार्थों की घुसपैठ और प्रशासनिक ढिलाई के खिलाफ एक कड़ा संदेश है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन सुधारों को कितनी गंभीरता से लागू करता है।


