हर बारिश में थम जाती है शहर की रफ्तार
गोरखपुर का धर्मशाला अंडरपास इन दिनों शहर की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। जिस अंडरपास को लोगों की राह आसान करने के लिए बनाया गया था, वही अब मानसून के सीजन में शहर के लिए ‘जी का जंजाल’ साबित हो रहा है। तेज बारिश होते ही यह अंडरपास पानी से लबालब भर जाता है, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती है।
शहर दो हिस्सों में क्यों बंट जाता है?
जैसे ही बारिश का पानी अंडरपास के निचले हिस्से में जमा होता है, शहर का संपर्क पूरी तरह से टूट जाता है। इसके कारण शहर दो हिस्सों में बंट जाता है और लोग एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए तरस जाते हैं। राहगीरों के लिए यह रास्ता न केवल बंद हो जाता है, बल्कि वाहनों के लिए भी यह बेहद खतरनाक हो जाता है।
स्थानीय निवासी सूरज सोनकर का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। सालों से हर मानसून में यही कहानी दोहराई जाती है। जैसे ही जलभराव की स्थिति बनती है, मुख्य सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव बढ़ जाता है, जिससे घंटों तक लंबा जाम लगा रहता है।

मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
इस समस्या के दूरगामी प्रभाव हैं, जो सीधे आम आदमी की जेब और समय पर असर डालते हैं:
- रोजमर्रा की जिंदगी: स्कूल जाने वाले बच्चे, दफ्तर जाने वाले लोग और इमरजेंसी सेवा वाली एंबुलेंस तक इस जाम में फंस जाती हैं।
- आर्थिक नुकसान: व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ता है और ईंधन की बर्बादी भी होती है।
- प्रशासनिक विफलता: बार-बार की शिकायत के बावजूद ड्रेनेज सिस्टम का फेल होना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
गोरखपुर के विकास का दम भरने वाले प्रशासन के लिए यह एक आईना है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस समाधान चाहती है ताकि बारिश के बाद शहर की रफ्तार न थमे।


