उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में जब भी सरकारी नौकरी की वैकेंसी निकलती थी, तो उसमें ‘चाचा-भतीजे’ की जोड़ी वसूली में जुट जाती थी, जिससे योग्य उम्मीदवार हमेशा पीछे छूट जाते थे।
रोजगार का नया दौर
मुख्यमंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान पुरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि पहले की व्यवस्था में नियुक्तियां योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि सिफारिशों और पैसों के लेनदेन पर तय होती थीं। आज उत्तर प्रदेश में युवाओं को बिना किसी भेदभाव के सरकारी नौकरी मिल रही है।
पारदर्शिता ही पहचान
योगी सरकार का दावा है कि बीते सात वर्षों में राज्य में लाखों युवाओं को निष्पक्ष तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य ‘मिशन रोजगार’ के तहत हर उस हाथ को काम देना है जो मेहनत करने का जज्बा रखता है।

मायने और प्रभाव
योगी आदित्यनाथ का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है:
- युवाओं का भरोसा: यह बयान उन लाखों युवाओं के लिए है जो सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और पारदर्शिता चाहते हैं।
- राजनीतिक संदेश: ‘चाचा-भतीजे’ का जिक्र सीधे तौर पर विपक्षी दलों के पारिवारिक शासन पर कटाक्ष है।
- बदलता परिवेश: यह संदेश देने की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश अब ‘भाई-भतीजावाद’ की संस्कृति से बाहर निकलकर ‘मेरिट’ की ओर बढ़ चुका है।
आम जनता के लिए इसका मतलब साफ है—प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार को कम करने के प्रयासों को सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रख रही है।


