उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों और जमीन के विवादों में उलझे लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अब आपको अपनी जमीन से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए बार-बार तहसील या कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। योगी सरकार जल्द ही राजस्व अदालतों में ‘ई-पेशी’ की सुविधा शुरू करने की तैयारी में है, जिससे मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी।
क्या है ई-पेशी का पूरा प्लान?
राजस्व परिषद ने इस बाबत सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। इसके तहत, यदि किसी पक्षकार को किसी कारणवश अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने में दिक्कत है, तो वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी बात रख सकेगा। वर्तमान में, राजस्व संबंधी वादों के लिए लंबी तारीखें मिलना और बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाना आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है।
डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम
इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल आम आदमी का समय बचेगा, बल्कि अदालती कार्यवाही में पारदर्शिता भी आएगी। प्रस्ताव पर शासन की मुहर लगते ही, प्रदेश भर के राजस्व न्यायालयों को इस डिजिटल प्रणाली से लैस कर दिया जाएगा। मुख्य बिंदुओं पर एक नजर डालें:
- समय की बचत: दूर-दराज के गांवों से आने वाले बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष राहत मिलेगी।
- पारदर्शिता: वीडियो रिकॉर्डिंग होने से सुनवाई की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट होगी।
- तेज निपटारा: पेंडिंग पड़े मुकदमों को तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी।
मायने और प्रभाव: आम जनता को क्या मिलेगा?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनकी जमीन के विवाद सालों से अदालतों की धूल फांक रहे हैं। अक्सर देखा जाता है कि किसान अपनी खेती छोड़कर तारीखों के लिए तहसील के चक्कर काटते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। ई-पेशी की सुविधा शुरू होने से न केवल कागजी कामकाज का बोझ कम होगा, बल्कि राजस्व अदालतों की कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा। यह डिजिटल बदलाव न्याय को जनता के दरवाजे तक पहुंचाने की एक सार्थक पहल साबित हो सकती है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था।


