उत्तर प्रदेश के बदायूं से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को आईना दिखा रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर न मिलने के कारण एक भाई को अपनी मरणासन्न बहन को कंधे पर लादकर दौड़ना पड़ा, लेकिन अफसोस कि इलाज के अभाव में बहन ने दम तोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार को 17 वर्षीय तरन्नुम की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसका भाई रियासत उसे फौरन राजकीय मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचा। रियासत का आरोप है कि अस्पताल परिसर में वह मदद के लिए भटकता रहा, लेकिन न तो उसे स्ट्रेचर मिला और न ही समय पर कोई कर्मचारी सहायता के लिए आगे आया।
जब हालात बिगड़ने लगे, तो लाचार भाई ने अपनी बहन को कंधे पर उठाया और दौड़ पड़ा। वह उसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की जद्दोजहद में था, लेकिन रास्ते में ही तरन्नुम ने दम तोड़ दिया।
लापरवाही का दंश और मौतों का सिलसिला
सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव आम जनता के लिए अक्सर जानलेवा साबित होता है। बदायूं की इस घटना ने एक बार फिर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था, तो उस वक्त ड्यूटी पर तैनात मेडिकल स्टाफ क्या कर रहा था?
मायने और प्रभाव
यह घटना केवल एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक है। आम जनता जो अपनी अंतिम उम्मीद के साथ सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचती है, यदि उन्हें वहां स्ट्रेचर तक नसीब न हो, तो यह किसी बड़े हादसे से कम नहीं है।
- जवाबदेही तय हो: प्रशासन को इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी स्टाफ पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
- सुधार की दरकार: अस्पतालों में कम से कम स्ट्रेचर और व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं की 24/7 उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
- भरोसा बहाली: ऐसी घटनाओं से जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर से भरोसा डगमगाता है, जिसे बहाल करने के लिए तत्काल सुधार की आवश्यकता है।


