गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने एक बार फिर खेती-किसानी की दुनिया में बड़ी लकीर खींची है। अब पारंपरिक रसायनों को छोड़कर ‘पंचगव्य’ के जरिए पोषक तत्वों से भरपूर काले गेहूं की पैदावार ने सबको चौंका दिया है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए एक वरदान है, बल्कि पूर्वांचल के किसानों की तकदीर बदलने की क्षमता भी रखता है।
स्वास्थ्य के लिए क्यों है खास काला गेहूं?
असिस्टेंट प्रोफेसर मोनालिसा के अनुसार, यह काला गेहूं सामान्य गेहूं की तुलना में कई गुना अधिक फायदेमंद है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स, आयरन और जिंक की भरपूर मात्रा पाई जाती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए किसी औषधि से कम नहीं है जो डायबिटीज और मोटापे जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।
पूर्वांचल की अनमोल विरासत: काला नमक चावल
विश्वविद्यालय के शोध में केवल गेहूं ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल की शान ‘काला नमक चावल’ पर भी जोर दिया गया है। अपनी अनूठी सुगंध और स्वाद के लिए मशहूर इस चावल में ऐसे मिनरल्स होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।
- हृदय स्वास्थ्य: नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है।
- ब्लड प्रेशर: रक्तचाप को संतुलित रखने में सहायक।
- इम्यूनिटी बूस्टर: शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है।
मायने और प्रभाव
इस शोध के सीधे तौर पर दो बड़े असर हैं। पहला, पंचगव्य का उपयोग खेती को पूरी तरह से ऑर्गेनिक (जैविक) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी। दूसरा, बाजार में बढ़ते ‘सुपरफूड’ के क्रेज के बीच, गोरखपुर के किसान इस महंगी फसल को उगाकर अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। यह प्रयोग न केवल सेहत के लिए अच्छा है, बल्कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती देने वाला है।




