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गाजियाबाद हत्याकांड: दरवाजे के छेद से बेटी ने देखी मां और मौसी की खौफनाक करतूत

एक खौफनाक वारदात और मासूम की आंखों देखी

गाजियाबाद के लोनी इलाके में हुई जाकिर की हत्या ने हर किसी को दहला दिया है। 23 जून को सामने आए इस हत्याकांड की परतें जब खुलीं, तो पुलिस भी दंग रह गई। आरोपी कोई और नहीं, बल्कि जाकिर की प्रेमिका किरण और उसकी बहन कशिश निकलीं, जिन्होंने बड़ी ही चालाकी से वारदात को अंजाम दिया था।

क्या था पूरा मामला?

ट्रोनिका सिटी की पूजा कॉलोनी में जाकिर का शव मिलने के बाद पुलिस ने जब छानबीन शुरू की, तो मामला आत्महत्या का लग रहा था। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज कर दिया। रिपोर्ट में साफ था कि जाकिर की मौत गला घोंटने से हुई थी। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और परिजनों से पूछताछ शुरू की, जिससे साजिश का जाल धीरे-धीरे साफ होने लगा।

बेटी की गवाही ने खोली पोल

पूछताछ में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस ने आरोपी किरण की 14 वर्षीय बेटी से बात की। मासूम बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसने दरवाजे के छेद से अपनी मां और मौसी को जाकिर के साथ संघर्ष करते देखा था। हत्या का मुख्य कारण बताते हुए पुलिस ने कहा कि जाकिर उसे पति के पास नहीं जाने दे रहा था और कथित तौर पर उसकी बेटी पर भी गलत नजर रखता था, जिससे तंग आकर मां-बेटी ने यह खूनी कदम उठाया।

हत्या की नाकाम साजिश

आरोपी बहनों ने इसे खुदकुशी दिखाने की पूरी कोशिश की, ताकि वे कानून की नजरों से बच सकें। उन्होंने मौके पर फंदा भी तैयार किया था, लेकिन वे उसे सही तरीके से अंजाम नहीं दे पाईं। बच्चों को कैब में बाहर भेजने का नाटक करना और फिर घर के अंदर हत्या को अंजाम देना, उनकी सोची-समझी साजिश का हिस्सा था, जो अंत में बेटी की गवाही से नाकाम हो गई।

मायने और प्रभाव

यह मामला समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। पारिवारिक कलह और निजी रंजिश में किस हद तक इंसान अपनी इंसानियत खो देता है, यह घटना उसका जीता-जागता उदाहरण है।

  • कानूनी सबक: किसी भी वारदात को ‘आत्महत्या’ का रूप देकर कानून से नहीं बचा जा सकता। डिजिटल युग में पुलिस की फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच से बचना नामुमकिन है।
  • पारिवारिक सुरक्षा: बच्चों का ऐसे माहौल में पले-बढ़े होना, जहां उनकी मां ही हत्या की साजिश रचे, उनके भविष्य पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • सावधानी: पुलिस ने इस केस को सुलझाकर यह साबित किया कि हर अपराध का एक चश्मदीद सबूत जरूर होता है, भले ही वह घर की चारदीवारी के अंदर ही क्यों न हो।

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