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अश्वगंधा, नीम और काली मिर्च हैं सेहत का खजाना: गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने बताए हैरान कर देने वाले फायदे

रसोई की ये औषधियां बदल सकती हैं आपकी जिंदगी

क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में रखे मसाले सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि कई बीमारियों को जड़ से खत्म करने की ताकत भी रखते हैं? भारतीय आयुर्वेद का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग के प्रोफेसर अभय का कहना है कि प्रकृति ने हमें ऐसी औषधियां दी हैं, जिनके सामने बड़ी से बड़ी आधुनिक दवाएं भी कमजोर पड़ जाती हैं.

अश्वगंधा: तनाव का काल

अश्वगंधा को आयुर्वेद में ‘रसायन’ माना गया है. यह शरीर की थकान मिटाने और मानसिक तनाव को दूर करने में जादुई असर दिखाता है. नियमित सेवन से यह न केवल इम्यूनिटी बढ़ाता है, बल्कि शरीर को नई ऊर्जा भी देता है.

नीम: कुदरती एंटीबायोटिक

नीम की पत्तियों को स्किन से जुड़ी समस्याओं के लिए रामबाण माना जाता है. प्रोफेसर अभय के अनुसार, नीम में मौजूद तत्व खून साफ करने और शरीर के जहरीले तत्वों (toxins) को बाहर निकालने में मदद करते हैं. संक्रमण से बचने के लिए इससे बेहतर और सस्ता उपाय दूसरा नहीं है.

काली मिर्च: मेटाबॉलिज्म का बूस्टर

काली मिर्च न केवल पाचन में मदद करती है, बल्कि यह शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण (absorption) को भी बेहतर बनाती है. सर्दी-जुकाम जैसे मौसमी संक्रमणों से बचने के लिए इसे काढ़े में लेना सबसे प्रभावी तरीका है.

मायने और प्रभाव: आम आदमी को क्या फायदा?

आज के दौर में हम महंगी और रासायनिक दवाओं पर निर्भर हो गए हैं, जिससे शरीर को नुकसान ही होता है. आयुर्वेद को अपनाने के पीछे की सबसे बड़ी वजह इसका ‘साइड इफेक्ट’ मुक्त होना है. आम जनता के लिए इसके मायने ये हैं:

  • कम खर्च: ये औषधियां बहुत सस्ती और आसानी से उपलब्ध हैं.
  • लंबी उम्र: प्राकृतिक चीजों के सेवन से शरीर की आंतरिक शक्ति बनी रहती है.
  • सुरक्षा: मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए आपको बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

प्रोफेसर अभय की सलाह है कि इनका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख या सही मात्रा में ही करना चाहिए. प्रकृति की इस थाली का लाभ उठाकर आप खुद को बीमारियों से कोसों दूर रख सकते हैं.

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