गोरखपुर में विकास की रफ्तार तो तेज हो रही है, लेकिन असुरन से पिपराइच तक बनने वाला प्रस्तावित फोरलेन अब विवादों के घेरे में आ गया है। सड़क निर्माण के लिए जब सर्वे टीम ने मौके पर पहुंचकर लाल निशान लगाए, तो लोगों की खुशी नाराजगी में बदल गई। प्रशासन द्वारा तय सीमा को 10.5 मीटर से बढ़ाकर 12 मीटर किए जाने का स्थानीय निवासी कड़ा विरोध कर रहे हैं।
सर्वे में अचानक क्यों बढ़ाई गई दूरी?
काफी समय से सुस्त पड़ा असुरन-पिपराइच फोरलेन निर्माण कार्य अब फिर से गति पकड़ता दिख रहा है। पीडब्ल्यूडी (PWD) और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने हाल ही में रामलीला मैदान से कबाड़ी रोड तक पैमाइश शुरू की है। इसी दौरान सड़क के मध्य बिंदु से 12 मीटर की दूरी पर लाल निशान लगाए गए, जिससे आसपास के दुकानदार और मकान मालिक सकते में आ गए।
विभाग के अवर अभियंता सुरेश सिंह का कहना है कि इलाके में ढाई मीटर चौड़ा नाला पहले से मौजूद है। जलनिकासी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही 12 मीटर की चौड़ाई मापी जा रही है। तकनीकी रूप से इसे सड़क की मजबूती के लिए जरूरी बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप: ‘दिए गए आश्वासन का क्या?’
इस फैसले से प्रभावित होने वाले लोगों का कहना है कि पहले उन्हें सड़क की चौड़ाई 10.5 मीटर रखने का आश्वासन दिया गया था। पिपराइच के शैलेश कुमार, रफीउद्दीन, जमील राइन और अन्य व्यापारियों का आरोप है कि स्थानीय विधायक महेंद्र पाल सिंह ने पूर्व में जो भरोसा दिलाया था, प्रशासन अब उससे पीछे हट रहा है।
- प्रभावित लोग: कई दुकानदारों ने पुराने आश्वासन के आधार पर अपने निर्माण कार्य शुरू कर दिए थे।
- नया संकट: 12 मीटर की पैमाइश से अब दर्जनों और मकानों व दुकानों के ढहने का खतरा पैदा हो गया है।
- आक्रोश: सर्वे टीम के सामने स्थानीय लोगों ने खुलकर आपत्ति दर्ज कराई है और इसे जनविरोधी निर्णय बताया है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
गोरखपुर के बुनियादी ढांचे के लिए यह फोरलेन एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, लेकिन इसका ‘असंतुलित’ विस्तार आम आदमी के लिए सीधा आर्थिक नुकसान लेकर आया है। मुआवजे की प्रक्रिया और संपत्ति के नुकसान का डर लोगों की रातों की नींद उड़ा रहा है।
यदि प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर इस विवाद को नहीं सुलझाते, तो यह परियोजना कानूनी पचड़ों में फंस सकती है, जिससे काम की रफ्तार फिर धीमी हो जाएगी। जनता चाहती है कि विकास हो, लेकिन वह विकास नहीं जो लोगों की रोजी-रोटी और सिर की छत छीन ले। अब देखना यह है कि क्या पीडब्ल्यूडी अपनी रिपोर्ट में बदलाव करती है या फिर विरोध प्रदर्शन और उग्र होंगे।




