हाथरस के एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक पिता ने अपनी पांचवीं संतान को खो दिया है, और इस बार परिवार ने मौत का कारण सरकारी टीकाकरण को ठहराया है। यह घटना न केवल एक परिवार का निजी दुख है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित पिता शेर सिंह ने बताया कि उनकी बेटी तन्नू की मौत टीकाकरण के कुछ ही समय बाद हुई। परिवार का आरोप है कि इंजेक्शन लगते ही बच्ची की तबीयत बिगड़ी और देखते ही देखते उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और स्थानीय लोग स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की जांच की मांग कर रहे हैं।
चार बेटों को पहले ही खो चुका है परिवार
यह त्रासदी यहीं खत्म नहीं होती। शेर सिंह के लिए यह किसी श्राप जैसा है कि इससे पहले भी वे अपने चार बेटों को कम उम्र में ही खो चुके हैं। घर में अब सिर्फ 12 साल की बड़ी बेटी कीर्ति और अन्य तीन बच्चे ही बचे हैं। एक के बाद एक पांच बच्चों को खोना किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय दर्द है।

मायने और प्रभाव
- स्वास्थ्य व्यवस्था पर अविश्वास: इस तरह की घटनाएं आम जनता के मन में सरकारी टीकाकरण अभियानों के प्रति डर पैदा करती हैं, जो भविष्य में टीकाकरण की गति को धीमा कर सकता है।
- गहन जांच की जरूरत: परिवार ने जिस तरह टीकाकरण को सीधे तौर पर मौत का कारण बताया है, उसके लिए प्रशासन को एक निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच करानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
- संवेदनशीलता की कमी: स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशील होना चाहिए ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
फिलहाल, जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। क्या यह वाकई टीकाकरण का दुष्प्रभाव था या कोई प्राकृतिक कारण, इसका जवाब अब मेडिकल रिपोर्ट में ही छिपा है।


