हाथरस जिले के बघाना गांव में इन दिनों हालात बदतर हो गए हैं। गांव की गलियों में घुटनों तक गंदा पानी भरा है, जिसकी वजह से आम जनजीवन पूरी तरह से ठप पड़ चुका है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है और घरों के अंदर जहरीले कीड़े रेंग रहे हैं।
बीमारियों की चपेट में गांव, जिम्मेदारों की खामोशी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव की यह समस्या पिछले काफी समय से बनी हुई है। गांव के किनारे स्थित पोखर की सफाई न होने के कारण बारिश का पानी निकासी नहीं पा रहा है। इसका सीधा असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
घरों के अंदर सीलन और गंदगी के कारण मच्छर पनप रहे हैं, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय अधिकारियों और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटे हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
मायने और प्रभाव: क्या है संकट की जड़?
- शिक्षा पर प्रहार: स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए घर से निकलना खतरे से खाली नहीं है, जिससे उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।
- सुरक्षा का सवाल: मकानों में जहरीले कीड़े और सांपों का निकलना ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
- प्रशासनिक विफलता: पंचायत स्तर पर जल निकासी के बुनियादी इंतजामों का अभाव सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
बघाना गांव के लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि जिला प्रशासन इस अनदेखी को खत्म करेगा और जल्द से जल्द पोखर की सफाई कराकर पानी की निकासी का स्थायी समाधान करेगा। अन्यथा, यह जलभराव आने वाले दिनों में किसी बड़ी महामारी को न्योता दे सकता है।




