मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त हिदायत और पुलिस महकमे के तमाम दावों की कलई हरदोई में खुल गई है। अभी सीएम की ओर से स्नेचिंग की घटनाओं पर लगाम लगाने के निर्देश दिए हुए 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के ऐतिहासिक हत्याहरण तीर्थ मेले में अपराधियों ने कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दे डाली।
मेले में उमड़ी भीड़, सक्रिय हुए उचक्के
रविवार को हत्याहरण तीर्थ में भक्तों की भारी भीड़ जुटी थी। इसी भीड़ का फायदा उठाकर उचक्कों ने एक के बाद एक कई घटनाओं को अंजाम दिया। खास बात यह है कि ये वारदातें उस पुलिस सहायता केंद्र के आसपास हुईं, जिसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था।
एक ही दिन में तीन बड़ी वारदातें
- खुशबू सिंह का मंगलसूत्र: संडीला की रहने वाली खुशबू जब सीताराम नाम संकीर्तन में शामिल होने आईं, तो पुलिस बूथ के ठीक पास उनके गले से सोने का मंगलसूत्र खींच लिया गया।
- आरती यादव का मंगलसूत्र: अतरौली निवासी आरती पूजा-अर्चना के बाद मेले में घूम रही थीं, तभी उचक्कों ने उनके गले को निशाना बनाते हुए मंगलसूत्र उड़ा दिया।
- मोबाइल चोरी: सीतापुर से दर्शन के लिए आए सर्वेंद्र यादव की जेब से भीड़ के बीच मोबाइल पार कर दिया गया।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
यह घटना सिर्फ एक चोरी का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक विफलता का बड़ा संकेत है। जब मुख्यमंत्री खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुरक्षा को लेकर स्पष्ट निर्देश दे चुके हों, तब उसके अगले ही दिन ऐसी घटनाएं पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।
जनता के लिए इसके मायने:
- घटता पुलिस का इकबाल: पुलिस सहायता केंद्र के नजदीक ऐसी घटनाएं होना यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन में कानून का डर लगभग खत्म हो चुका है।
- धार्मिक आयोजनों पर संकट: हत्याहरण जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम न होना भविष्य में श्रद्धालुओं के भरोसे को कम कर सकता है।
- सुरक्षा का दावा बनाम हकीकत: आम नागरिक जब मेले या बाजार में जाता है, तो वह सुरक्षा की उम्मीद करता है। ऐसी घटनाओं से स्थानीय जनता के बीच असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
अब देखना यह होगा कि क्या इन वारदातों के बाद हरदोई पुलिस कोई ठोस कदम उठाती है या फिर यह मामला भी महज फाइलों में दबकर रह जाएगा।




