प्यार की मिसाल: औरैया में एक साथ उठी दंपत्ति की अर्थी
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के मधवापुर गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। कहते हैं कि ‘साथ जिएंगे और साथ मरेंगे’, लेकिन इस बुजुर्ग दंपत्ति ने इसे हकीकत में साबित कर दिखाया। पत्नी की मौत का सदमा पति बर्दाश्त नहीं कर सका और कुछ ही पलों के भीतर उसने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।
आखिरी रस्म और सिंदूर की लकीर
घटना की शुरुआत तब हुई जब लंबे समय से बीमार पत्नी ने दम तोड़ दिया। घर में मातम पसर गया और परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गया। इस दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला—पति ने अपनी पत्नी की अर्थी पर लेटे हुए आखिरी बार उसकी मांग में सिंदूर भरा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
सदमा बर्दाश्त न कर सका दिल
पत्नी के बिछड़ने का गम पति के लिए असहनीय हो गया। जैसे ही पत्नी के अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी हुई, पति की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। देखते ही देखते उसने भी दम तोड़ दिया। आसपास के लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही घर में दोहरा मातम छा गया।
मायने और प्रभाव
इस घटना के गहरे सामाजिक मायने हैं:
- भावनात्मक जुड़ाव: यह घटना दिखाती है कि दशकों तक साथ निभाने वाले दंपत्ति के बीच का भावनात्मक रिश्ता कितना गहरा होता है।
- मानसिक स्वास्थ्य: उम्रदराज लोगों में जीवनसाथी को खोने का सदमा कई बार शारीरिक कमजोरी पर भारी पड़ जाता है, जिसे ‘ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम’ के रूप में भी देखा जा सकता है।
- सामुदायिक संवेदना: मधवापुर के ग्रामीणों ने एक साथ दो अर्थियां उठते देख इस अटूट बंधन को आधुनिक युग के लिए एक बड़ी सीख माना है।




